पांखू-धरमघर सड़क पर देवीगाड़ नाला उफान पर आने से उखड़ा डामर। संवाद
पिथौरागढ़/थल। सीमांत जिले में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित रहा। नदी-नाले उफान पर आ गए। सड़कों पर जलभराव होने से यात्रियों, वाहन चालकों और राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। नाला उफान पर आने से पांखू-धरमघर सड़क पर एक घंटे तक वाहनों की रफ्तार थमी रही। सड़क के दोनों तरफ रोडवेज बस सहित अन्य वाहन फंसे रहे। इधर, मलबा आने से लोध-मालाकोट सड़क बंद हो गई है।
जिले में बीते मंगलवार रात और बुधवार सुबह भारी बारिश हुई। जिला मुख्यालय के साथ ही कनालीछीना, डीडीहाट, बेड़ीनाग, गंगोलीहाट, थल, झूलाघाट, धारचूला, मुनस्यारी सहित अन्य हिस्सों में बारिश से जनजीवन प्रभावित रहा। सड़कों पर जगह-जगह जलभराव हो गया। नदी-नाले उफान पर आने से आसपास रहने वाले दहशत में रहे। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक बीते 24 घंटे में जिला मुख्यालय में सबसे अधिक 79 मिमी बारिश दर्ज की गई। धारचूला में 43.20, कनालीछीना में 29.6, डीडीहाट में 27.40, बेड़ीनाग में 20, तेजम में 15 और बंगापानी में 12 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
बारिश के बाद तापमान गिरने से लोगों को गर्मी से राहत मिली है। वहीं पांखू-धरमघर सड़क पर देवीगाड़ नाला उफान पर आने से आवाजाही ठप हो गई। ऐसे में दिल्ली सहित अन्य मार्गों पर जाने वाली रोडवेज बस सहित अन्य वाहन फंसे रहे। एक घंटे बाद नाले का प्रवाह कम होने से वाहनों की आवाजाही शुरू हुई। मलबा आने से लोध-मालाकोट सड़क बंद है। इस कारण क्षेत्र के चार से अधिक गांवों का सड़क संपर्क कट गया है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र महर ने बताया कि बारिश से नुकसान की कोई सूचना नहीं है।
पांच दिन बाद भी नहीं खुलीं दो सड़कें
पिथौरागढ़। बीते दिनों हुई बारिश के बाद मलबा आने से डीडीहाट-हुनेरा और देवीसूना-खेतार कन्याल सड़कें बंद हो गई थीं। पांच दिन बाद भी इन सड़कों को नहीं खोला जा सका है। ऐसे में क्षेत्र की दो हजार से अधिक की आबादी का गांवों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। ग्रामीण मलबा और बोल्डरों के बीच पैदल सफर कर स्थानीय बाजार पहुंच रहे हैं। पीठ पर ढोकर दैनिक जरूरत का सामान घर पहुंचाना ग्रामीणों की मजबूरी बना है। संवाद