लोकतंत्र के चुनावी समर के बीच टमाटर का रंग भी गहरा लाल हो गया है। पिछले माह तक बेभाव बिकने वाले टमाटर ने इन दिनों महिलाओं की रसोई का जायका बिगाड़ दिया है। सब्जियों के दामों में लगातार उछाल से गृहणियों को बजट का संतुलन बनाए रखने में काफी माथापच्ची करनी पड़ रही है।
पिछले माह तक जहां टमाटर 20 रुपये किलो बिक रहा था, वहीं अब यह 50 रुपये किलो तक पहुंच गया है। इससे रसोई का जायका बिगड़ गया है।
सब्जियों की दुकान में रेट पूछ महिलाएं कह रही हैं ‘आफि रुं तो बज्यूंड़ो, ततु महंगो को खा सकोलो हो’। इन दिनों अन्य सब्जियों के दाम भी काफी अधिक बढ़ हुए हैं।
जिला मुख्यालय में लौकी, फूल गोभी, मटर, खीरा, कद्दू 40-40 रुपये किलो, भिंडी, बीन 100 रुपये, आलू 15, प्याज 20 और बंद गोभी 30 रुपये किलो बिक रहे हैं। सब्जी के थोक विक्रेताओं का कहना है कि बेमौसमी सब्जियां महंगी है, जबकि इस सीजन में कम पैदावार होने से टमाटर के दाम बढ़े हुए हैं।