जून 2013 से खतरे की जद में जी रहे झूलाघाट के लोगों ने सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। लोगों का आरोप है कि सिंचाई विभाग ने तटबंध बनाने का काम आधे में छोड़ दिया है। 2013 से खतरे की जद में आए 40 मकानों की सुरक्षा के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। 2013 के बाद अब तक तीन आवासीय मकान और एक दुकान महाकाली में समा गए हैं।
झूलाघाट क्षेत्र के लोग आज 30 किलोमीटर का सफर तय कर जिला मुख्यालय में प्रदर्शन के लिए आए थे। क्षेत्र पंचायत सदस्य मनीष महर ने कहा कि आपदा जैसे मामले के प्रति इतनी संवेदनहीनता समझ से परे है। आपदा के बाद कई मंत्रियों और अधिकारियों ने यहां का दौरा किया, लेकिन अब तक लोगों की सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि सिंचाई विभाग ने बीच में काम किन कारणों से छोड़ा है।
अपर जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि सिंचाई विभाग को तत्काल तटबंध का निर्माण पूरा करने को कहा जा रहा है। प्रदर्शन में विधायक प्रतिनिधि संजीव जोशी, दिवाकर भट्ट, गणेश भट्ट, सुरेश भट्ट, संजय पंगरिया, किशोर जोशी, डिगरदेव गड़कोटी आदि शामिल थे।
आपदा प्रभावितों को नहीं मिला मुआवजा
पिथौरागढ़। तहसील धारचूला के घट्टाबगड़ तोली गांव के नौ आपदा प्रभावितों को अब तक मुआवजे की राशि नहीं मिली है। इन लोगों के मकान जून 2013 की आपदा के समय क्षतिग्रस्त हो गए थे। मुआवजे की मांग पर लोगों ने 21 जनवरी को धरना भी दिया था। घट्टाबगड़ के गणेश सिंह, बहादुर राम, भानी राम, चंद्रा देवी, शिव राम, प्रेम राम, लछी राम, गोपाल राम और सुंदर राम ने कहा है कि यदि मुआवजा नहीं मिला तो आमरण अनशन शुरू कर देंगे।