असली सूडानी नागरिक मुस्तफा मोईया मोहम्मद के सामने आने के बाद अब सवाल उठता है कि ढाई माह पहले इसी नाम से फर्जी पासपार्ट के साथ दबोचा गया विदेशी नागरिक कौन और किस देश का रहने वाला है? पुलिस और तमाम खुफिया एजेंसियां इसका पता लगाने में जुट गई हैं। कुछ खुफिया एजेंसी सूडान एंबेसी के संपर्क में है।
ढाई माह पूर्व 18 नवंबर 2014 को भारत से नेपाल जाते समय सूडानी नागरिक मुस्तफा मोईया मोहम्मद को नकली पासपोर्ट के साथ बनबसा इमिग्रेशन चेकपोस्ट में दबोच विदेशी अधिनियम समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया था। इन दिनों वो अल्मोड़ा की जेल में बंद है। खुफिया तंत्र इस मामले में सूडान एंबेसी के संपर्क में हैं। एलओसी (लुक आउट सर्कुलर) जारी होने के बाद सूडान निवासी मुस्तफा मोहम्मद नामक व्यक्ति संदेह के घेरे में था। गत 22 जनवरी को सूडान से आ रहे असली मुस्तफा मोईया मोहम्मद को मुंबई एयरपोर्ट पर रोक लिया गया था।
खुफिया एजेंसी के एक अधिकारी की माने तो फर्जी पासपोर्ट के साथ दबोचे गए अल्मोड़ा जेल में बंद विदेशी नागरिक के बारे में गहन छानबीन की कार्रवाई की जा रही थी। उसने बताया कि असली मुस्तफा के सामने आने से यह गंभीर प्रश्न उठ खड़ा हुआ है कि अल्मोड़ा जेल में बंद कथित सूडान का नागरिक कौन है। खुफिया एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही है कि वह किसी देश का खुफिया एजेंट तो नहीं है।
नवंबर 2014 को फर्जी पासपोर्ट के साथ दबोचा गया नागरिक किस देश का है इसकी जांच की जा रही है। पता चलने पर उसे न्यायालय की कार्रवाई के बाद उसके देश वापस भेजा जाएगा। देश का पता नहीं चलने पर उसे पूरा जीवन भारत में जेल में व्यतीत करना होगा।
भारत में पढ़ा है असली मुस्तफा मोईया मोहम्मद
बनबसा (चंपावत)। सूडान से 22 जनवरी को भारत आ रहे जिस सूडान नागरिक मुस्तफा मोईया मोहम्मद को मुंबई एयरपोर्ट से पकड़ कर यहां लाया है वह ही असली है। उसने अमर उजाला को बताया कि वह पहली बार 2003 में एजूकेशनल वीजा पर सूडान से भारत आया और 2009 तक हैदराबाद में रहकर बीएससी, कंप्यूटर साइंस के साथ फ्रैंच भाषा में डिप्लोमा लेकर सूडान लौटा। फिर 2010 में उसे चार साल के लिए मुंबई की लार्क फार्मा कंपनी में नौकरी के लिए वीजा मिला था। वो चार अक्तूबर 2014 को वीजा अवधि समाप्त होने के बाद वापस सूडान लौट गया था। तीन माह बाद जब गत 22 जनवरी को लौटा तो उसे मुंबई एयरपोर्ट पर रोक कर यहां लाया गया है।