ध्वस्त पनचक्की के पास बैठी लछिमा देवी।
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मदकोट (पिथौरागढ़)। दो जुलाई की आपदा में 80 वर्षीय बेसहारा आमा लछिमा देवी का मकान और पनचक्की भी बर्बाद हो गई। आमा को आज तक मुआवजा नहीं मिल पाया।
आमा लछिमा देवी गोरी पुल के पास बने मकान में ही पनचक्की चलाती थीं। इसमें गेहूं पिसाने आने वाले लोग आमा को उसका हिस्सा भी दे जाते थे। इसी से आमा का खर्चा चलता था। आपदा ने आमा को इस कदर जख्म दिए कि उनकी सूनी आंखें आज भी मलबे में अपनी पनचक्की को ढूंढती हैं। उनकी तीन शादीशुदा बेटियां हैं। एक बेटा था जिसकी कई साल पहले मौत हो गई। पति की 15 वर्ष पूर्व ही मौत हो गई थी। तब से पनचक्की ही आमा का सहारा थी। उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिल पाया।
पनचक्की आपदा राहत में नहीं आती है। मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता दिलाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
- डॉ. ललित मोहन तिवारी, तहसीलदार मुनस्यारी।