धारचूला (पिथौरागढ़)। नेपाल के वामपंथी दलों ने तिंकर दर्रे से तिब्बत व्यापार शुरू करने के लिए बड़ा अभियान चलाने का एलान कर दिया है। भारतीय क्षेत्र में लिपुलेख दर्रे से हर साल जून से लेकर अक्तूबर तक तिब्बत व्यापार होता है। नेपाल के वामपंथी चाहते हैं कि तिंकर दर्रे से भी इसी तरह व्यापार शुरू होना चाहिए और नेपाल के व्यापारियों को तिब्बत की मंडी तकलाकोट जाने की अनुमति मिलनी चाहिए।
दार्चुला के वाणिज्य कार्यालय में हुई सोमवार को बैठक में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के केंद्रीय सदस्य और इस अभियान के संयोजक कृष्णा केसी ने कहा कि इस अभियान के पीछे कोई राजनैतिक मंशा नहीं है वरन छांगरु और तिंकर के पिछड़े इलाकों के विकास में यह व्यापार सहायक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस अभियान को दबाव अभियान नाम दिया गया है।
इसमें सुदूर पश्चिमांचल के चार जिलों डडेलधुरा, दार्चुला, गोकुल्या, बैतड़ी के लोगों के साथ साथ चार अंचलों सेती, महाकाली, बागमती, सुदूर पश्चिमांचल के 500 लोगों को जोड़ा जाएगा। यह लोग नेपाल की राजधानी काठमांडू जाकर सरकार पर दबाव बनाएंगे, ताकि संसद के आगामी सत्र में यह प्रस्ताव लाया जा सके।
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) के जिला सचिव मनबहादुर बम ने कहा कि तिंकर से व्यापार शुरू होने पर भारत और नेपाल के रिश्ते और मजबूत होंगे, क्योंकि नेपाल के व्यापारियों को पहले भारतीय क्षेत्र में धारचूला जाना होगा। वहां से वह गर्ब्यांग में सीतापुल पारकर तिंकर पहुंचेंगे। इससे दोनों देशों के बीच आवाजाही बढ़ेगी।
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के जिलाध्यक्ष मान बहादुर धामी ने कहा कि इस मांग को लेकर कोई गलतफहमी न पाली जाए। उन्होंने कहा कि इस समय नेपाल के हुमलाजुमला स्थित खासा दर्रे से तिब्बत व्यापार होता है लेकिन यह दर्रा काफी दुर्गम है। विष्णु अवस्थी ने संचालन किया।
धारचूला। नेपाल के छांगरु, तिंकर क्षेत्र के पिछड़ेपन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वहां पर मोटा चावल 80 रुपये किलो और नमक 60 रुपये किलो बिकता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि तिंकर तक आवागमन की सुविधा नहीं है। पैदल पहुंचने में चार दिन लगते हैं। यदि तिंकर दर्रे से व्यापार शुरू हो जाए तो इलाके में संपन्नता आ जाएगी।