पिथौरागढ़ में आदमखोर तेंदुए को तलाशती शिकारी और वन विभाग की टीम। अमर उजाला
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पिथौरागढ़। नगर और आसपास के गांवों में तेंदुए का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। पपदेव गांव में बीती रात फिर से तेंदुए ने दस्तक दी। तेेंदुआ शिकारियों के हत्थे चढ़ता इससे पूर्व ही वह खतरा भांप भाग गया। शिकारियों की टीम ने रात में एक बजे तक गश्त की। आदमखोर तेंदुए पर निगरानी के लिए वन विभाग ने पपदेव गांव में 15 फीट ऊंचा मचान बना लिया है। साथ ही विभाग के 40 कार्मिकों की टीम भी जंगल की खाक छान रही है।
तीन सितंबर को मोस्टामानू मेला से लौट रही पपदेव गांव की महिला किरन पर हमला कर तेंदुए ने उसे मौत के घाट उतार दिया। ग्रामीणों के रोष को देखते हुए वन विभाग ने तेंदुए को आदमखोर घोषित किया। तेंदुए पर नजर रखने के लिए शुरू में 18 कार्मिक तैनात किए गए। साथ ही पौड़ी से शिकारी जॉय हुकिल की टीम को भी बुलाया गया। पिछले पांच दिन से वन विभाग और शिकारियों की टीम पपदेव, पौण और बजेटी के जंगलों की खाक छान रही है। क्षेत्र में चार तेंदुए भी चिन्हित किए गए हैं। आदमखोर तेंदुए पर नजर रखने के लिए पिथौरागढ़ के साथ ही डीडीहाट, धारचूला, अस्कोट और गंगोलीहाट रेंज से कार्मिक बुलाए गए हैं। वन क्षेत्राधिकारी दिनेश चंद्र जोशी ने बताया कि उप रेंजर देवेंद्र राय, वन दरोगा हेम जोशी, कैलाश ग्वासीकोटी के साथ ही सात वन दरोगा और 27 वन रक्षक रात-दिन क्षेत्र में निगरानी रख रहे हैं। रात को एक टीम वरदायिनी मंदिर के निकट व्यू प्वाइंट पर और अन्य पपदेव गांव में गश्त कर रहे हैं। शिकारी जॉय हुकिल ने बताया कि बृहस्पतिवार रात आठ बजे तेंदुआ पपदेव गांव के एक घर के आंगन में फिर से दिखाई दिया। जब तक टीम पहुंचती वह भाग गया। टीम रात एक बजे तक गांव में गश्त करती रही। तेंदुए पर निगरानी रखने को तीन शिकारियों के बैठने के लिए मचान बनाया गया है। रेंजर जोशी ने बताया कि आदमखोर तेंदुए के आतंक से निजात दिलाने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। इधर तेंदुए को लेकर लोगों में दहशत बरकरार है।
कोट अमोड़ी क्षेत्र में तेंदुए का आंतक
चंपावत। जिला मुख्यालय के दूरस्थ कोट अमोड़ी क्षेत्र में इन दिनों तेंदुए का आतंक बना हुआ है। तेंदुआ दिनदहाड़े ही बकरियों को आंगन से उठा कर ले जा रहा है। अब तक दस बकरियों सहित कुल 15 जानवरों को मार चुका है। ग्रामीण कमल दत्त भट्ट ने बताया कि पिछले दिनों सदर्का गांव के ईश्वरी दत्त भट्ट की तीन बकरियों को एक साथ मार दिया था। दिनेश भट्ट, प्रकाश भट्ट, खिलानंद भट्ट, कैलाश भट्ट आदि ग्रामीणों ने वन विभाग से सुरक्षा की मांग उठाई है।