भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय व्यापार
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तिब्बत की मंडी तकलाकोट में स्टील के बर्तनों की मांग बहुत अधिक है। इस बार भी सीमांत के व्यापारी स्टील के 400 डिनरसेट लेकर तकलाकोट जाने की तैयारी कर रहे हैं। यह सारी सामग्री मुरादाबाद से मंगाकर पहले ही रख ली जाती है। इन बर्तनों में स्टील के डिनरसेट, भगोने, कटोरे, थालियां, प्लेट, चाउमीन और मो मो बनाने वाली मशीन शामिल हैं। 1992 में जब से तिब्बत व्यापार फिर से शुरू हुआ तभी से स्टील के बर्तनों को तकलाकोट ले जाना शुरू हो गया था। तिब्बत के पठारी इलाके के बाजार में स्टील के बर्तन कम मात्रा में मिलते हैं।
तिब्बत व्यापार में हिस्सा लेने वाले व्यापारियों ने बताया कि हाल के वर्षों में स्टील के बर्तनों की मांग बहुत बढ़ी है। यह बात अलग है कि इतनी सामग्री तिब्बत पहुंचा पाना कठिन रहता है। सीमांत के व्यापारी स्टील के बर्तनों में अच्छा मुनाफा कमा लेते हैं। इसमें लाने का भाड़ा भी शामिल किया जाता है। इसके अलावा गुब्बारों की मांग भी बहुत अधिक रहती है। जून से व्यापार शुरू होता है, उसके बाद तिब्बत में कई स्थानीय मेले आयोजित होते हैं।
उनमें खिलौनों की बिक्री भी बढ़ जाती है। भारत-तिब्बत व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन रौंकली का कहना है कि यदि सरकार व्यापार को प्रोत्साहन दे तो यह सीमांत के लोगों की आर्थिकी को मजबूत करने में सहायक हो जाएगा। व्यापार संघ अध्यक्ष भूपेंद्र थापा का कहना है कि तिब्बत में व्यापार की अपार संभावनाएं हैं। सरकार को इस दिशा में ध्यान देना चाहिए।
गुड़ को पैकेट में ले जाने की तैयारी
तिब्बत की मंडी में खुला गुड़ बेचने पर रोक लगने के कारण अब व्यापारी गुड़ को पैकेट में ले जाने की तैयारी में हैं। 500 ग्राम के गुड़ के पैकेट में निर्माण की तिथि और एक्सपायरी तिथि दोनों अंकित करने की तैयारी की जा रही है। हालांकि इस तरह के गुड़ ले जाना काफी महंगा बैठता है। पैकिंग चार्ज अलग से देने पड़ेंगे। इस बार पैक्ड गुड़ ले जाने की तैयारी तो की गई, लेकिन इसमें अब तक कामयाबी नहीं मिल पाई है। अगले साल तक यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। गुड़ को तराई की मिलों से लाकर तिब्बत पहुंचाया जाता है।