भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय स्थल व्यापार में शामिल होने वाले भारतीय व्यापारी अब अगले साल से तकलाकोट मंडी में तंबाकू नहीं ले जा पाएंगे। पिछले साल व्यापार बंद होने से पहले चीन के अधिकारियों ने गुड़ और मिश्री लाने पर रोक लगा दी थी। नया प्रतिबंध लगने से अगले साल से व्यापारियों को भारी घाटा उठाना पड़ सकता है। भारतीय व्यापारी तिब्बत की मंडी में तंबाकू का अच्छा खासा व्यापार कर लेते हैं।
भारतीय व्यापारी हर साल 80 से 100 क्विंटल तक सुरती तकलाकोट लेकर जाते हैं। पिछले साल तक तिब्बत व्यापार में गुड़ और मिश्री भी शामिल थी। चीन के अधिकारियों ने यह कहते हुए गुड़ और मिश्री पर रोक लगा दी थी कि यह दोनों ही पैकेज्ड नहीं होते और इस वजह से इनकी गुणवत्ता पर संदेह बना रहता है। इस बार चीनी अधिकारियों ने तंबाकू को व्यापार की श्रेणी से हटा दिया है। चीन के वाणिज्य कर अधिकारियों ने भारतीय व्यापारियों के साथ हुई बैठक में यह साफ तौर पर बता भी दिया।
इस बैठक में शामिल रहे तिब्बत की मंडी से अंतिम दल के साथ लौटे व्यापारी नरेंद्र बिष्ट ने बताया कि 25 अक्तूबर को चीन के वाणिज्य विभाग के अफसरों ने भारतीय व्यापारियों के साथ बैठक की और अगले साल से तंबाकू नहीं लाने को कह दिया। बिष्ट के मुताबिक इस प्रतिबंध से भारतीय व्यापारियों को खासा नुकसान उठाना पड़ेगा। पहले गुड़ और मिश्री पर प्रतिबंध की भरपाई भारतीय व्यापारियों ने चाय, दियासलाई, सोन पापड़ी आदि से की थी।
भारतीय व्यापारियों के मुताबिक चीन की मंशा आयात को कम करना और निर्यात बढ़ाने की है। यही वजह है कि चुन-चुन कर चीन को अधिक निर्यात होने वाली वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। चीन ने तिब्बत में भारतीय सीमा पर स्थित लिपुलेख दर्रे तक फोरलेन सड़क बना दी है। तकलाकोट में कई संचार कंपनियों के नेटवर्क हैं। व्यापारी नरेंद्र बिष्ट ने एसबीआई की शाखा तकलाकोट में खोलने और गुंजी स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में मुद्रा विनिमय की सुविधा देने की मांग भी की है।