तिब्बत की मंडी तकलाकोट में अब व्यापारिक गतिविधियां गति पकड़ने लगी हैं। तिब्बत की मंडी से रेडीमेड कपड़े, तिब्बती ऊन के बने कंबल, ऊन, चंवर गाय की पूंछ, चंवर गाय की दूध से बनने वाली छिरबी, चायना की चाय का आयात होने लगा है। भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय स्थल व्यापार 31 अक्तूबर को समाप्त हो जाएगा। उस दिन तक व्यापारियों को लिपुलेख दर्रा पारकर भारतीय क्षेत्र में पहुंचना होगा।
तिब्बत की मंडी में इस समय सीमांत के 80 व्यापारी हैं। तकलाकोट से फोन पर भारत तिब्बत व्यापार समिति के दौलत रायपा ने बताया कि अब मंडी में भारतीय सामान की बिक्री बढ़ने लगी है। यह बात अलग है कि चीन में चल रही आर्थिक मंदी का असर व्यापार पर पड़ रहा है। इस बार तिब्बत की मंडी में भेड़ें नहीं मिल रही हैं। उन्होंने जानकारी दी कि तिब्बत की मंडी में गुड़, स्टील के बर्तन, सुरती का व्यापार ठीक चल रहा है। अब चूंकि व्यापार के कम समय रह गए हैं इस कारण व्यापारी तेजी से सामान की बिक्री करने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। तिब्बत की मंडी गए व्यापारी जीवन रौंकली, दीवान सिंह गर्ब्याल, पदम सिंह रायपा, विशन सिंह गर्ब्याल, दिनेश गुंज्याल आदि ने कहा कि अब व्यापार का समय कम रह गया है। 25अक्तूबर से व्यापारी सामान समेटकर भारतीय क्षेत्र में पहुंचने की तैयारी करने लगेंगे। व्यापारियों ने कुछ सामान भारतीय क्षेत्र में पहुंचाना शुरू कर दिया है। भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय स्थल व्यापार की प्रक्रिया हर साल जून से शुरू होती है। इस बार व्यापारी जुलाई मध्य तक तिब्बत की मंडी को रवाना नहीं हो पाए थे।