पिथौरागढ़। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजय सिंह की अदालत ने नौकरी लगाने के नाम पर धोखाधड़ी करने के दोषियों को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा दोषियों पर 5,15,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने सभी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अक्तूबर 2019 में दीपक बिष्ट ने पिथौरागढ़ कोतवाली में तहरीर देकर बताया कि मो. जावेद, राज कुमार और गोविंद सिंह भैसोड़ा ने एम्स ऋषिकेश में फार्मासिस्ट के पद पर छह माह के अंदर नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया और उससे 2,75,000 रुपये की धोखाधड़ी की।
इस दौरान तीनों के खिलाफ कोतवाली पिथौरागढ़ में भारतीय दंड संहिता की धारा 420/467/168/171 और 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की विवेचना कर मई 2020 में उपनिरीक्षक दीपक बिष्ट ने मो. जावेद, राजकुमार, गोविंद सिंह भैसोड़ा के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। तब से यह मामला न्यायालय में चल रहा था। इस पर शनिवार को फैसला आया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजय सिंह की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और साक्ष्यों का परिशीलन करने के बाद मो. जावेद और राजकुमार को धारा 420/471/120 बी के अपराध में दोषसिद्ध करार देते हुए तीन-तीन वर्ष का सश्रम कारावास और 2.15-2.15 लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है।
गोविंद सिंह भैसोड़ा को धारा 420 और 120बी के अपराध में दोष सिद्ध करार देते हुए तीन वर्ष का सश्रम कारावास और 1.10 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर दो माह अतिरिक्त कारावास भोगना पड़ेगा। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। मो. जावेद और राज कुमार को धारा 467 और 468 के विचरित अपराधों से दोषमुक्त किया।