भाषा, भावना और भ्रष्टाचार तीन ‘भ’ के जरिए ही पीएम मोदी ने लोगों की जन भावनाओं को छूने का प्रयास किया। तीन ‘भ’ के आसपास ही उनका भाषण केंद्रित रहा, जिसे जनता ने खूब पसंद किया।
पीएम मोदी जनसभा को संबोधित कर रहे थे, लेकिन उनका अंदाज जनता से सीधे संवाद की तरह था। मंच पर दोनों तरफ पर्दे लगे थे। ऐसे में साइड में बैठे लोगों को मंच पर देखने में दिक्कत आ रही थी। प्रधानमंत्री ने मंच पर पहुंचते ही लोगों की दिक्कत को समझा और दोनों तरफ के पर्दे खुलवा दिए। दूर इमारतों पर जो लोग बैठे थे, उनको संबोधित करते हुए पूछ लिया... आवाज तो सुनाई दे रही है।
इसके बाद भाषण की विधिवत शुरुआत कुमाऊंनी में की, कुमाऊंनी बोलते ही लोगों का उत्साह और बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने भावनाओं को छूने की कोशिश की। एक अनुमान से पिथौरागढ़ जिले में 24 हजार सैनिक परिवार हैं, ऐसे में वन रैंक-वन पेंशन, फौज के हवलदार रैंक तक के कर्मियों की बेटी के विवाह के लिए मिलने वाली राशि को 16 हजार से तीन गुना करना, नौकरी के दौरान विकलांग होने वाले सैनिकों की समस्या को हल करने के लिए अपने कार्यकाल की कोशिशों और नए प्रयासों का जिक्र किया। उन्होंने कांग्रेस पर फौजियों की मांगों को नजरंदाज करना और सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाकर सेना के सम्मान को चोट पहुंचाने की बात करते हुए भी घेरा।
इसके बाद उन्होंने चिर-परिचत अंदाज में भ्रष्टाचार के लिए प्रदेश सरकार और खासकर मुख्यमंत्री हरीश रावत पर हमला बोला। कहा कि यहां पर हरदा टैक्स देना पड़ता है। उन्होंने पीएम बनने के बाद केंद्र सरकार की नौकरियों में साक्षात्कार की व्यवस्था को खत्म कर दिया, इसके लिए उत्तराखंड सरकार से भी कहा, लेकिन प्रदेश सरकार ने सहमति नहीं दी। जनता इस भ्रष्टाचार से ऊब चुकी है। उन्होंने कहा कि जो परिणाम होगा वह अभूतपूर्व होगा और यह सरकार भूतपूर्व हो जाएगी।