सात अगस्त को रक्षाबंधन के दिन चंद्रग्रहण होने के कारण इस बार श्रावणी उपाकर्म 28 जुलाई को मनाया जाएगा। 28 जुलाई को ही नए जनेऊ को धारण करेंगे और पंडित के हाथ का रक्षातागा भी 28 जुलाई को ही बांधा जाएगा। सात अगस्त को सिर्फ राखी का पर्व होगा। पहाड़ पर प्रचलित पंडित रामदत्त जोशी के पंचांग में यही व्यवस्था दी गई है। इस आधार पर यहां के पंडित तैयारी करने लगे हैं। 28 जुलाई को नागपंचमी का पर्व है और उस दिन हस्त नक्षत्र भी पड़ रहा है।
पंडित आनंद बल्लभ जोशी ने बताया कि सात अगस्त की रात 10.53 बजे से चंद्रग्रहण लगेगा। ग्रहण काल में आठ घंटे पहले से अशुद्धि हो जाती है और कोई भी धार्मिक कार्य नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि इस समस्या का समाधान पंचांग में दिया गया है कि श्रावणी उपाकर्म को पहले कर दिया जाए। श्रावणी उपाकर्म हिंदू धर्म को मानने वालों और जनेऊ धारण करने वालों का सबसे बड़ा पर्व है। इस दिन लोग नए जनेऊ की प्रतिष्ठा करते हैं। एक स्थान पर एकत्रित होकर पंडित ऋषि तर्पण करते हैं।
उसके बाद पंडित अपने यजमान की कलाई पर येन बद्धो बली राजा दानवेंद्रो महाबल मंत्र के साथ रक्षातागा बांधते हैं। आमतौर पर यह सारे विधान रक्षाबंधन के दिन ही होते हैं लेकिन इस बार चंद्रग्रहण के कारण विशेष परिस्थिति पैदा होने से यह आयोजन पहले किया जाएगा। उधर, मुनस्यारी में पंडित मदन मोहन लोहनी ने भी यही बताया कि श्रावणी उपाकर्म 28 जुलाई को नागपंचमी के दिन होगा।