पशुबलि रोकने के लिए खड़े एसडीएम वैभव गुप्ता
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प्रशासन ने इस बार त्रिपुरादेवी के नंदाष्टमी मेले में पशु बलि नहीं होने दी। इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों और लोगों के बीच नोकझोंक भी हुई। श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में पशुबलि को छोड़, अनुष्ठान और अन्य धार्मिक कार्यक्रम कराने दिए गए। त्रिपुरादेवी मंदिर में नंदाष्टमी को रात का मेला लगता है। यहां हर साल पशुबलि की प्रथा थी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन मेले में पशुबलि रोकने के लिए चौकन्ना था। शुक्रवार शाम अलग-अलग गांवों से लोग अष्टबलि के लिए बकरों और कटरों को लेकर ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते गाते हुए मंदिर परिसर पहुंचे थे। पुलिस फोर्स के साथ मेले में पहुंचे एसडीएम वैभव गुप्ता ने न्यायालय के आदेश का हवाला देकर पशुबलि नहीं होने देने की बात लोगों से कही। इस पर वहां तनाव पैदा हो गया।
लोगों ने परंपरा और आस्था का हवाला देकर कार्यक्रम को पूर्व की भांति जारी रखने का अनुरोध किया, लेकिन प्रशासन ने इजाजत नहीं दी। बाद में पूजा-अर्चना के सभी कार्यक्रम मंदिर परिसर में करने और बलि के लिए लाए गए तीन दर्जन बकरों और भैंसों को लौटा दिया गया। एसडीएम वैभव गुप्ता और थाना प्रभारी एनबी भट्ट पूरी रात मेले में डटे रहे।
मां नंदा का डोला विसर्जित
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। मां नंदा के डोले को शनिवार को चर्मा नदी में विसर्जित कर दिया गया। नंदा महोत्सव समिति के अध्यक्ष डीएस पांगती, संरक्षक ललित भंडारी, प्रकाश बोरा, बबलू पंचपाल, नेपाल सिंह, लोकपति, पवन टोलिया, बासु रावत समेत कई लोग शनिवार सुबह जयकारे के साथ नंदा के डोले को विसर्जन के लिए ले गए। इससे पहले हवन किया गया और लोगों सुख, शांति की कामना की गई।