सीआरपीएफ के काठगोदाम सेंटर में तैनात डीडीहाट के ननकुड़ी गांव के बलदेव नई कार खरीदकर अपने ईष्ट देव की पूजा करने के लिए पत्नी, बेटा-बेटी और जेठू के साथ अपने पैतृक गांव आ रहे थे। मैदान की प्रचंड गर्मी में पत्नी और बच्चों के साथ पैतृक गांव में कुछ दिन सुकूल के पल बिताने की मंशा के साथ सभी हल्द्वानी से शुक्रवार सुबह सात बजे हंसी-खुशी रवाना हुए।
उन्हें यह मालूम नहीं था कि रास्ते में एक दर्दनाक हादसा उनका इंतजार कर रही है और वह अब कभी अपने घर नहीं जा सकेंगे। जिस कार को उन्होंने बड़े शौक से खरीदा वही उनकी मौत का कारण बनेगी। चंपावत के बापरू में उनकी कार खाई में गिर गई। कार में आग लगने से बलदेव और जेठू राजेंद्र कुमार काल के गाल में समा गए। पत्नी व दोनों बच्चे घायल हो गए।
ननकुड़ी की पूर्व प्रधान ममता बोहरा ने बताया कि बलदेव ने दो सप्ताह पहले की नई कार खरीदी थी। वह इसी कार से पत्नी और बच्चों के साथ पूजा के लिए अपने पैतृक गांव आ रहे थे।
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नीतू के पति का साथ भी छूटा, बड़े भाई का सिर से हाथ भी उठा
लोहाघाट (चंपावत)।
हादसे में नीतू ने अपने पति बलदेव को खोया तो बड़े भाई राजेंद्र कुमार का भी सिर से हाथ उठ गया। घायल नीतू ने बताया कि चार जून को कार ली थी। वह सुबह सात बजे काठगोदाम से गांव के लिए निकले। कार भाई चला रहा था। बड़ी खुशी-खुशी परिवार गांव की ओर बढ़ रहे थे लेकिन 12:30 बजे कार अनियंत्रित होकर क्रश बैरियर तोड़ते हुए खाई में जा गिरी। कुछ देर पहले की हंसी-खुशी चीख पुकार में बदल गई। कार खाई में गिरते ही पहले बेटा आरव छटका। फिर बेटी अक्षिता, इसके बाद नीतू। जमाई जेठू कार में फंसे रह गए। बलदेव कार में लगी आग से बुरी तरह झुलस गए। वह मदद के लिए चीखते रहे और जलकर मौत हो गई, जबकि जेठू की गर्दन की हड्डी टूट गई। कटर से कार को काटा गया। तब जाकर दोनों के शवों को निकाला गया। दोनों की मौत की खबर के बाद काठगोदाम और पैतृक गांव में शोक की लहर डूब गई।
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मेरा लड्डू, मेरे आरू को एक बार दिखा दो
लोहाघाट।
पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग में बंतोली के पास हुई कार दुर्घटना के बाद जब घायलों को उपचार के लिए उप जिला अस्पताल लाया गया तो उस दौरान घायल नीतू अपने परिवार के प्रति काफी चिंतित थीं। उपचार के दौरान नीतू कह रहीं थीं मेरा लड्डू मेरा आरू कैसा है। अपने बच्चों, पति और भाई के बारे में पूछती रहीं। उन्हें पता नहीं था कि हादसे में उनके पति और भाई की मौत हो गई है।
नीतू ने बताया कि उनके पति बलदेव कुमार सीआरपीएफ में तैनात हैं और उन्होंने इसी माह चार जून को नया वाहन खरीदा था। शुक्रवार को वह हल्द्वानी से अपने गांव के लिए सुबह सात बजे रवाना हुए थे। उनके बड़े भाई राजेंद्र वाहन चला रहे थे। वाहन दुर्घटना में नीतू का हंसता खेलता परिवार उजड़ गया।
पत्नी कर रही थी इंतजार, मिली पति की मौत की खबर
अजेड़ा के राजेंद्र कुमार मछली पालन कर दो बेटे, दो बेटी और पत्नी का पालन-पोषण कर रहे थे। करीब डेढ़ महीने पहले वह इलाज कराने के लिए चंडीगढ़ पीजीआई गए। इलाज कराने के बाद वह हल्द्वानी में रहने वाली अपनी बहन के घर लौटे। बहन नीतू देवी और बहनोई बलदेव कुमार ने नई कार से साथ में डीडीहाट लौटने का कार्यक्रम तय किया। शुक्रवार सुबह सभी पिथौरागढ़ के लिए रवाना हुए। राजेंद्र कुमार की पत्नी सरोज ननद और पति के घर लौटने का इंतजार कर रही थी लेकिन उसे पति की मौत की खबर मिली। पति की सड़क हादसे में मौत के बाद सरोज बदहवास है तो बच्चों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। संवाद
फायर ब्रिगेड और पुलिस कर्मियों ने किया सराहनीय कार्य
वाहन दुर्घटना में फायर ब्रिगेड और पुलिस टीम ने सराहनीय कार्य किया। ग्रामीणों की मदद से घायलों को दुर्गम खाई से निकालकर सुरक्षित अस्पताल भिजवाया, वहीं कार के भीतर जले वाहन स्वामी सीआरपीएफ जवान को कड़ी मशक्कत के बाद निकालने में सफलता हासिल की। राहत और बचाव टीम में शामिल प्रभारी थाना अध्यक्ष कुंदन बोहरा, फायर ब्रिगेड प्रभारी सुनील जोशी, लीडिंग फायरमैन कुंदन सिंह फायरमैन गोविंद मनराल, अनवर अली, राजेंद्र जोशी, हिमांशु कुमार, पारस वर्मा, प्रियंका बिष्ट आदि ने राहत और बचाव कार्य में सराहनीय कार्य किया।
सेना के जवानों ने भी दिखाई तत्परता
दुर्घटना की सूचना मिलते ही सेना के आर्मी मेडिकल कॉर्प्स के कैप्टन मोहित कापड़ी, नर्सिंग असिस्टेंट श्यामवीर सिंह, चालक सिपाही गणेश निषाद और सिपाही योगेंद्र देवरी मौके पर पहुंचे। दुर्घटना में घायल आरव जीवित अवस्था में मिला। सेना के जवानों ने बिना समय गंवाए उसे प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) प्रदान किया। सुरक्षित रूप से खाई से बाहर निकालकर तत्काल लोहाघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। समय पर दिए गए प्राथमिक उपचार और त्वरित चिकित्सा सहायता के कारण सात साल के आरव की जान बचाई जा सकी। स्थानीय लोगों ने सेना के जवानों की तत्परता, साहस और मानवता की भावना की सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आपदा और संकट की घड़ी में सेना के जवान सदैव लोगों की सहायता के लिए तत्पर रहते हैं।