पिथौरागढ़। सेना में कसम परेड का नाम तो सभी ने सुना है। पंचायत चुनाव में भी अब कसम परेड होगी। सेना की कसम परेड में सैनिक हर हाल और परिस्थिति में देश की सुरक्षा की शपथ लेता है। पंचायत चुनाव में जल्द ही बीडीसी सिर्फ और सिर्फ बॉस को वोट देने की कसम खाकर उसके ठिकाने से बाहर निकलेंगे। ऐसा पहली बार नहीं होगा जब ब्लॉक प्रमुख के दावेदार बॉस के पक्ष में वोट करने की शपथ बीडीसी सदस्य लेंगे। पिछले चुनाव में भी बॉस के ठिकाने के साथ ही न्याय की देवी कोटगाड़ी सहित अन्य मंदिरों में इस तरह की कसमें खाई गई हैं।
जिले के आठों विकासखंडों में ब्लॉक प्रमुख का चुनाव 14 अगस्त को होगा। 287 बीडीसी सदस्य अपना मुखिया चुनेंगे। पंचायत चुनाव की मतगणना होते ही ब्लॉक प्रमुख के संभावित दावेदार अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए बीडीसी सदस्यों को कहां ले गए, इसका किसी को पता नहीं है। यह पक्का है कि चुनाव के समय जनता से उनके हितों के लिए लड़ने का वादा करने वाले ये योद्धा फिलहाल उनके दुख-दर्द से दूर अपने बॉस के ठिकाने पर सैर-सपाटा कर रहे हैं।
संभावित सेना नायक ने इन योद्धाओं को इसलिए छुपाया है कि वोट देने तक ये किसी भी विपक्षी सेना या संभावित सेना नायक के संपर्क में न आ सकें और उसकी जीत की राह आसान हो सके। चुनाव की तिथि घोषित हो चुकी है और अब इन योद्धाओं के मैदान में वापस लौटने के दिन नजदीक हैं। जिस तरह सैनिक सेना का हिस्सा बनने से पहले कसम परेड में शामिल होकर देश की सुरक्षा की शपथ लेता है। ठीक इसी तरह इन योद्धाओं को भी अपने संभावित सेना नायक को विजयी बनाने की कसम खानी होगी। संवाद
पिछले चुनाव में न्याय की देवी कोटगाड़ी सहित अन्य मंदिरों में खाई गईं कसम
पिछले चुनाव में भी बीडीसी सदस्यों के गायब होने का सिलसिला जारी रहा। तब भी बाहरी दुनिया से दूर बॉस के ठिकाने में कई दिनों तक रहे। इस ठिकाने से निकलने के बाद वोट देने से पहले बॉस के पक्ष में ही खड़े रहने की शपथ लेने इन्हें न्याय की देवी कोटगाड़ी सहित अन्य मंदिरों में ले जाया गया। कोटगाड़ी मंदिर में शपथ लेने के बाद भी एक विकासखंड में कुछ बीडीसी सदस्यों ने भितरघात कर अपने बॉस को दरकिनार कर अन्य के पक्ष में वोट डालकर उसे जिता दिया। यह मामला आज तक चर्चाओं में है।
बहनों से राखी भी नहीं बंधवा सके बीडीसी सदस्य
भाई और बहन के बीच अटूट रिश्ते का प्रतीक राखी पर्व भी बीडीसी सदस्यों ने बॉस के ठिकाने पर मनाया। किसी ने काठमांडो तो किसी ने पश्चिम बंगाल, रामनगर सहित अन्य स्थानों पर ठिकाना बनाया है। पंचायत चुनाव के फेर में बीडीसी सदस्य ऐसे फंसे की बॉस ने उन्हें फिलहाल घर आने की इजाजत नहीं दी। ऐसे में अधिकांश बीडीसी सदस्य बहनों से राखी नहीं बंधवा सके।