पिथौरागढ़। प्रादेशिक सेना भर्ती ने प्रशासन की नींद तो उड़ाई है, वहीं विद्यार्थियों की दिक्कत बढ़ाने का भी काम किया है। भर्ती रैली के चलते चार दिन से नगर के 50 से अधिक स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई ठप है। ऐसे में बोर्ड परीक्षा के नजदीक होने के चलते 15,000 से अधिक विद्यार्थियों को घर बैठना पड़ा है। बच्चों की पढ़ाई ठप रहने से अभिभावक बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं, इस पर सवाल उठने भी शुरू हो गए हैं।
भर्ती रैली में पहुंचे युवाओं को ठहराने के लिए 20 नवंबर से तीन दिन के लिए नगर के सभी स्कूलों को बंद रखने का आदेश जारी हुआ था। तीसरे दिन ही प्रशासन ने भर्ती रैली के चलते ट्रैफिक अधिक होने से विद्यार्थियों की परेशानी का हवाला देते हुए अगले दिन भी स्कूल बंद रखने का आदेश जारी किया।
लोगों का कहना है कि सीमांत में आयोजित भर्ती रैली भी विद्यार्थियों की दृष्टि से किसी आपदा से कम नहीं है। यदि भर्ती रैली में आने वाली भीड़ का पहले ही अंदाजा लगाकर इससे निपटने की उचित व्यवस्था कर ली जाती तो स्कूल बंद नहीं करने पड़ते और बोर्ड परीक्षा नजदीक होने के बाद भी बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होती। संवाद
भर्ती रैली में अव्यवस्था मानवजनित आपदा
पिथौरागढ़। भर्ती रैली में अव्यवस्थाएं, युवाओं पर लाठियां फटकारने और स्कूलों में पढ़ाई ठप रखने पर सभी की कार्यशैली पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। सोशल मीडिया पर भी चर्चाएं गर्म है। लोगों ने इन अव्यवस्थाओं को मानवजनित आपदा करार दिया है। लोगों का कहना है कि बरसात में स्कूलों का बंद होना नया नहीं है। जब बिना किसी कारण के चार दिन स्कूल बंद कर दिए जाएं तो यह सिस्टम की कार्यशैली पर ब़ड़ा प्रश्नचिह्न है। सीमांत में प्रशासन, पुलिस, सरकार की भारी चूक से मानवजनित आपदा खड़ी हुई है।
पहली बार नहीं हो रही सेना भर्ती
पिथौरागढ़। लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि पिथौरागढ़ में सेना भर्ती पहली बार नहीं हो रही लेकिन इस बार ऐसा क्या हुआ जिसने इतनी अधिक अव्यवस्था को पैदा कर दिया। लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि सीमांत में अब सेना और प्रशासन के बीच कोई तालमेल ही नहीं रह गया है। पुलिस व केंद्रीय एजेंसियों का खुफिया तंत्र भांप ही नहीं पाया कि यह स्थिति पैदा हो जाएगी। प्रशासन ने व्यवस्था के नाम पर स्कूल बंद करने के निर्देश देकर सेना भर्ती को भी आपदा में बदल दिया। संवाद
बोले अभिभावक
भर्ती रैली में पहुंचने वालों के रहने-खाने की व्यवस्था भी जरूरी है। प्रशासन और सेना को आपसी तालमेल से व्यवस्थाएं करनी चाहिए थीं। विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए था। स्कूल बंद करने से बच्चे घर पर हैं। भर्ती रैली में चूक का यह नतीजा है। - दीपा भंडारी।
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सेना और प्रशासन को मिलकर भर्ती रैली में पहुंचे युवाओं के ठहरने की व्यवस्था करनी चाहिए थी। स्कूल बंद रहने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। यदि भर्ती रैली में पहुंचे युवाओं और विद्यार्थियों की परेशानी को ध्यान में रखकर तैयारी की जाती तो ये हालात पैदा न होते। - प्रदीप तिवारी।