पिथौरागढ़ जिले के धारचूला के उच्च हिमालयी क्षेत्र में काफी समय बाद जमकर बर्फबारी हुई है। धारचूला के दारमा घाटी के सोबला-ढाकर सड़क पर पड़ने वाले ग्लेशियर प्वाइंट चलखुम, गलछिन, यूसुंग और वोरुंग में चार से पांच फुट तक बर्फ पड़ी है। इन जगहों पर 200-300 मीटर के क्षेत्र में काफी बर्फ जमा हो गई है। इससे गर्मियों के सीजन में हिमालयी ग्लेशियरों से निकलने वाली नदियों में पानी की कमी नहीं रहेगी।
इस बार नवंबर, दिसंबर और जनवरी बगैर बारिश और ठंड के ही निकल गए। इससे हिमालयी चोटियां जहां काली दिखाई देने लगीं, वहीं प्राकृतिक पेयजल स्रोत भी सूखने के कगार पर पहुंच गए थे। बीच-बीच में उच्च चोटियों पर बर्फ गिरती रही, लेकिन तेज धूप से वह टिकी नहीं पाई।
फरवरी के अंतिम दिन ने लोगों को निराश नहीं किया। मुनस्यारी बाजार समेत ऊंची चोटियों पर जमकर बर्फबारी हुई है। हंसलिंग, राजरंभा, नाग्निधुरा, छिपलाकेदार, पंचाचूली, ओम पर्वत और आदि कैलाश की चोटियां बर्फ से पूरी तरह आच्छादित हो गईं हैं।
खेतों में बनी रहेगी नमी, अच्छी होगी फसल
सोन दुग्तु के सामाजिक कार्यकर्ता राम सिंह सोनाल ने बताया कि पांच-छह साल बाद घाटी में अच्छी बर्फबारी हुई है। उनका कहना है कि इससे लंबे समय तक खेतों में नमी बनी रहेगी और फसलों का उत्पादन अच्छा होगा। पंचाचूली ग्लेशियर की चोटी पर पांच और जमीन पर चार फुट तक बर्फ गिरी है। होम स्टे संचालक संजय जंग और गुड्डू जंग ने बताया कि इस बार गर्मियों में पर्यटकों को क्षेत्र में अच्छी बर्फ देखने को मिलेगी।
यूसुंग नाले को बड़ी मुश्किल से किया पार
दारमा घाटी के यूसुंग नाले में करीब पांच फुट तक बर्फ जमा है। सोबला-ढाकर सड़क बर्फ से पटी है, जिससे चलते यहां आवाजाही बंद है। सड़क पर चार फुट तक बर्फ है। नागलिंग में रह रहे मजदूर किसी तरह यूसुंग नाले को पार कर 12 किमी पैदल चलकर धारचूला पहुंचे। ग्रिफ के मेट रूप सिंह सेलाल, कविंद्र सिंह नगन्याल ने बताया कि मौसम ठीक होने के बाद सड़क खोलने का कार्य किया जाएगा।
अच्छी बर्फबारी हुई है। इससे उच्च हिमालयी क्षेत्र में कई ग्लेशियर बने हैं। इससे हिमालयी नदी नालों में पानी की कमी नहीं रहेगी। यह फसल और पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद रहेगा।
- डॉ.चेतन भट्ट, मौसम विशेषज्ञ।