अस्कोट (पिथौरागढ़)। उत्तराखंड में राज्य की समृद्धशाली लोक संस्कृति के संरक्षण पर ध्यान नहीं देने पर उत्तराखंड सांस्कृतिक मंच ने नाराजगी जताई है। अध्यक्ष गोविंद भंडारी ने कहा कि समाज की लोक संस्कृति व सभ्यता को उसके गीत और संगीत से आवाज मिलती है। इसके माध्यम से अपनी संस्कृति और सभ्यता न केवल प्रसारित होती है बल्कि उनका संरक्षण भी होता है। नौ वर्ष पूर्व सरकार की ओर से घोषित उत्तराखंड राज्य गीत लगातार उपेक्षा के चलते लगभग गुमनाम सा हो गया है। इसकी सुध लेने की फुर्सत किसी को भी नहीं है।