सैमली गांव के लोग आज भी सड़क सुविधा से महरूम है। यातायात सुविधा नहीं होने से गांव के 30 से अधिक परिवार पलायन कर चुके हैं। सैमली गांव तक पहुंचने के लिए क्वीटी से तीन किमी की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। पूरा रास्ता बियाबान जंगल से होकर गुजरता है।
मुनस्यारी विकासखंड के सैमली गांव के लोग आज भी सड़क सुविधा से महरूम है। यातायात सुविधा नहीं होने से गांव के 30 से अधिक परिवार पलायन कर चुके हैं। सैमली गांव तक पहुंचने के लिए क्वीटी से तीन किमी की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। पूरा रास्ता बियाबान जंगल से होकर गुजरता है। गर्भवतियों या गांव में किसी के बीमार पड़ने पर उसे डोली में रखकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। खाद्यान्न से लेकर हर जरूरी सामान पीठ पर ढोना ग्रामीणों ग्रामीणों की मजबूरी है।
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ग्रामीणों ने सड़क गांव तक नहीं पहुंचने के लिए शासन प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता को जिम्मेदार बताया है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2008 से ग्रामवासी सड़क निर्माण की गुहार लगाते रहे हैं। 2016 में सड़क को स्वीकृति मिली। लोक निर्माण विभाग और वन विभाग की ओर से दो बार संयुक्त निरीक्षण भी किया गया। नौ साल बाद भी सड़क निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।
जनप्रतिनिधियों ने भी उनकी अनदेखी की है। इस कारण लोगों को पैदल आवागमन करना पड़ रहा है। अधिकतर परिवार गांव से शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं। ग्रामीणों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर सड़क बनाने की मांग की है।
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एक ओर सरकार गांव-गांव तक सड़क निर्माण की बात कर रही है, दूसरी ओर सैमली जैसे दुर्गम गांव को आज भी उपेक्षित छोड़ा गया है। 55 से अधिक परिवार सैमली में रहते थे। पलायन के कारण अब 25 परिवार रह गए हैं। अब केवल मुख्यमंत्री से ही सड़क निर्माण की उम्मीद है। - जीवन द्विवेदी, पूर्व ग्राम प्रधाम सैमली।