पिथौरागढ़। चीन सीमा को जोड़ने वाली सड़क धारचूला से लेकर गुंजी तक अभी खतरनाक स्थित में है। सड़क चौड़ीकरण के लिए की गई ब्लास्टिंग से कई जगहों पर बोल्डर और मलबा अटका हुआ है। इसके चलते बरसात के सीजन में सड़क पर वाहनों की आवाजाही बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। ऐसे में आदि कैलाश और ओम पर्वत जाने वाले यात्रियों को सावधानी से यात्रा करनी होगी।
धारचूला से पूर्व नया बस्ती, छारछुम के बीच भी सड़क संवेदनशील बनी हुई है। बलुवाकोट से तवाघाट के बीच 35 किलोमीटर सड़क चौड़ीकरण का कार्य बीआरओ 67 आरसीसी की हिलवेज कंपनी की ओर से किया जा रहा है। इसमें 30 किलोमीटर तक तो चौड़ीकरण एवं डामरीकरण का कार्य कर लिया गया है। पांच किमी क्षेत्र में भू स्वामियों को मुआवजा नहीं मिलने से अभी कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
दोबाट से तवाघाट तक के क्षेत्र में भी पहाड़ियां संवेदनशील हैं। पहाड़ी पर अटके पत्थर और बोल्डर कब गिर जाएं, कोई पता नहीं। मलघाट में 500 मीटर क्षेत्र में पहाड़ी पर मलबा अटका है। यहां पर खड़ी चट्टानें हैं। पहाड़ी से पत्थर गिरने की स्थित में संभलने के लिए भी जगह नहीं है। इस पहाड़ी का विशेष उपचार किया जाना है। मालपा-लामारी के बीच भी पहाड़ी पर बोल्डर अटके हुए हैं।
इसी तरह तवाघाट से कालापानी तक 58 किलोमीटर सड़क पर 204 करोड़ रुपये की लागत से सड़क चौड़ीकरण, सुधारीकरण एवं डामरीकरण का कार्य अगले दो साल में किया जाना है। यहां बीआरओ 67 आरसीसी की सारथी कंस्ट्रक्शन कंपनी कार्य कर रही है। सड़क पर यातायात को सुगम बनाने के लिए सात गार्डर पुल भी बनाए जाने हैं। गुंजी-नाभी-कुटी-ज्योलिंगकांग 36 किलोमीटर सड़क का कार्य पूरा कर लिया गया है। सड़क चौड़ीकरण के दौरान की गई ब्लास्टिंग से कई जगहों पर पहाड़ियां कमजोर हो गई हैं। इसके चलते इनके बरसात में दरकने का खतरा बना हुआ है।