पिथौरागढ़। जिले में मौन पालन व्यवसाय में कमी आ रही है। शहद का उत्पादन घटने और मधुमक्खियों के जंगलों की ओर भागने से मौन पालक भी परेशान हैं। मौन पालन को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग अब जिले के आठों विकासखंडों के मौन पालकों को प्रशिक्षण के लिए राज्य से बाहर भेजेगा।
जिले में इस समय लगभग 2500 मौन पालक हैं। जलवायु परिवर्तन, फूलों की कमी, जंगलों में आग जैसे तमाम कारणों से पिछले कुछ समय से शहद उत्पादन में कमी आई है। इस वर्ष मौन बॉक्स से मधुमक्खियों के जंगलों की ओर भागने के सैकड़ों मामले सामने आए हैं। इससे मौन पालकों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। मौन पालन को बढ़ावा देने के लिए अब उद्यान विभाग की ओर से योजना बनाई जा रही है। विभाग अब मौन पालकों को राज्य से बाहर प्रशिक्षण के लिए भेजेगा।
प्रशिक्षण के लिए आठों ब्लाकों से मौन पालकों का चयन किया जाएगा। मुख्य उद्यान अधिकारी अभिनय कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए चयनित काश्तकारों को लगभग एक से दो माह के भीतर प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। विभाग की ओर से शासन को मौन पालन प्रशिक्षण के लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि मौन पालन के साथ ही काश्तकारों को सब्जी उत्पादन, कीवी उत्पादन पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे काश्तकार अधिक शहद, फल-सब्जी का उत्पादन कर सकेंगे।
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गलाती को बनाया जाएगा मौन ब्रीडिंग सेंटर
उद्यान विभाग धारचूला के गलाती क्षेत्र में मौन ब्रीडिंग सेंटर विकसित करेगा। इस केंद्र में मधुक्खियों की ब्रीडिंग कर मौन पालकों को उपलब्ध कराया जाएगा। इससे मौन पालकों को मौन वंश को बाहर से नहीं खरीदना पडे़गा। संवाद