पिथौरागढ़। सीमांत जिले के प्राथमिक, जूनियर हाईस्कूल और इंटर कॉलेज शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं, लेकिन यहां उच्च शिक्षा का भी बुरा हाल है। लक्ष्मण सिंह महर महाविद्यालय को कैंपस का दर्जा मिलने के बाद भी यहां प्राध्यापकों के 25 पद रिक्त हैं। हालात यह हैं कि भौतिक विज्ञान, गणित और कॉमर्स विषयों को पढ़ाने के लिए प्राध्यापक नहीं मिल रहे।
जिले के सबसे बड़े लक्ष्मण सिंह महर महाविद्यालय को कैंपस बनाया गया। उम्मीद थी कि कैंपस बनने के बाद यहां शिक्षण व्यवस्था बेहतर होगी और 5000 से अधिक विद्यार्थियों को प्राध्यापकों की कमी से नहीं जूझना होगा। अब तक ऐसा नहीं हो सका है।
परिसर में प्राध्यापकों के 118 पद सृजित हैं। परिसर बनने के एक साल बाद भी यहां 25 प्राध्यापकों के पद रिक्त हैं। स्थायी प्राध्यापकों की तैनाती न होने से 62 अतिथि प्राध्यापकों की तैनाती कर किसी तरह व्यवस्था चल रही है।
परिसर में भौतिक विज्ञान के पांच, गणित और कॉमर्स के चार-चार प्राध्यापकों के पद स्वीकृत हैं। भौतिक विज्ञान पढ़ाने के लिए सिर्फ एक, गणित, कॉमर्स पढ़ाने के लिए सिर्फ दो-दो प्राध्यापक तैनात हैं। संवाद
नारायणनगर महाविद्यालय में भी गणित, भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर नहीं
पिथौरागढ़। नारायणनगर महाविद्यालय में गणित और भौतिक विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्राध्यापक नहीं हैं। ऐसे में क्षेत्र के विद्यार्थियों को इन विषयों का ज्ञान लेने के लिए अन्य महाविद्यालयों की दौड़ लगानी पड़ रही है। वहीं दो साल से यहां प्राचार्य का पद रिक्त है। संवाद
कोट-
परिसर सहित अन्य महाविद्यालयों में प्राध्यापकों की नियुक्ति के प्रयास किए जा रहे हैं। नियुक्ति के लिए विज्ञप्ति निकाली गई है। उम्मीद है सभी रिक्त पदों पर जल्द तैनाती होगी। - डॉ. हेम पांडेय, निदेशक, लक्ष्मण सिंह महर परिसर, पिथौरागढ़।