नेपाल के बैतड़ी के जिलाधिकारी लीलाधर अधिकारी ने जुलाघाट में फिर से करेंसी एक्सचेंज काउंटर खोलने का प्रस्ताव बनाकर नेपाल सरकार को भेज दिया है। करेंसी काउंटर न होने के कारण लोगों को हो रही दिक्कत के बारे में अमर उजाला 29 दिसंबर के अंक में रिपोर्ट प्रकाशित की थी। जुलाघाट का यह काउंटर 1996 में माओवादी आंदोलन के दौरान बंद हो गया था।
अमर उजाला में खबर छपने के बाद नेपाल के मीडिया ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। बैतड़ी के डीएम का कहना है कि भारत और नेपाल के बीच खुला आवागमन होता है। मुद्रा विनिमय न होने से लोगों को दिक्कत हो रही है। अब नेपाल में सारी परिस्थितियां बदल गई हैं। ऐसे में करेंसी एक्सचेंज काउंटर को खोला जाना जरूरी है। नेपाल के सीमावर्ती बाजारों के लोग भारतीय मुद्रा का प्रयोग करते हैं। डीजल, पेट्रोल की तस्करी के समय भी भारतीय मुद्रा ही उपयोग में लाई जाती है। करेंसी एक्सचेंज का काम सीमा से सटे बाजारों के कुछ व्यापारी करते हैं। वह मुद्रा विनिमय के तौर पर चार से पांच प्रतिशत कमीशन ले लेते हैं। मधेसी आंदोलन के कारण हो रही नाकेबंदी का असर मुद्रा पर भी पड़ रहा है। नेपाल में भारतीय मुद्रा की कमी का एक कारण यह भी है। बैतड़ी के व्यापारी भी चाहते हैं कि यदि वैध तरीके से मुद्रा एक्सचेंज हो जाए तो लोगों को नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।