फिर उठा महाकाली पर पुलों के निर्माण का मुद्दा
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भारत और नेपाल के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में इस बार फिर से झूलाघाट और धारचूला में महाकाली में पुलों के निर्माण का मुद्दा प्रमुखता से उठ गया। यह दोनों पुल पिछले दस साल से प्रस्तावित हैं, लेकिन इनके निर्माण के लिए न तो एजेंसी तय हो पाई है और न स्थान का निर्धारण ही हो पाया है। भारत और नेपाल के बीच आवागमन को सुगम बनाने और व्यापार की गतिविधियों को तेज करने के लिए इन पुलों के निर्माण का प्रस्ताव है।
झूलाघाट में प्रस्तावित 150 मीटर लंबे पुल के लिए कई बार सर्वे हो चुका है। पिछले साल नेपाल में भारत के राजदूत रंजीत रे ने भी पुल निर्माण की संभावना देखी और आश्वस्त किया कि जल्दी ही पुल का निर्माण शुरू हो जाएगा। पुल के निर्माण में 50 प्रतिशत खर्च नेपाल सरकार को और इतना ही खर्च भारत सरकार को करना है। अभी पुलों की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट नहीं बनी है। ऐसे में यह तय नहीं हो पाया है कि पुल के निर्माण में कितना खर्च आएगा। ताजा बैठक में कहा गया कि पुल निर्माण के लिए दोनों देशों की संयुक्त टीम सर्वे करेगी। यदि झूलाघाट में मोटर पुल बन जाता है तो भारतीय क्षेत्र के लोगों को पहाड़ी रास्ते से सीधे काठमांडू तक जाने में आसानी होगी।
ठीक यही स्थिति धारचूला में प्रस्तावित मोटर पुल की भी है। यह पुल बनने पर धारचूला और नेपाल के दार्चुला जिला मुख्यालय के बीच सीधा आवागमन हो जाएगा। दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने की भी उम्मीद है। लोनिवि के मुख्य अभियंता एसके शर्मा ने कहा कि दोनों पुलों की मंजूरी मिल गई है। अब जल्दी ही डीपीआर बनाकर काम शुरू किया जाएगा।