नाचनी में हर्बल धूप और अगरबत्ती की पैकिंग करतीं महिलाएं। स्रोत: रीपफोटो 22 पीटीएच 04पी- नाचनी म
पिथौरागढ़। नाचनी में स्वयं सहायता समूह की तीन महिलाएं हर्बल धूप और अगरबत्ती तैयार कर स्वरोजगार से जुड़ी हैं। इनकी मेहनत रंग ला रही है और ये इस व्यवसाय से हर महीने छह से सात हजार रुपये कमा रही हैं। हर्बल धूप और अगरबत्ती की स्थानीय बाजारों और गांवों में खासी मांग है। इससे महिलाओं को इन उत्पादों के लिए बाजार भी नहीं खोजना पड़ रहा है।
संगठन से जुड़ी गीता देवी, किरन देवी और दमयंती देवी ने ग्रामोत्थान के क्लस्टर लेवल फेडरेशन फंड से 1.50 लाख रुपये का ऋण लेकर स्वरोजगार शुरू किया। ये महिलाएं लोबान, कपूर, जटामासी, नागरमोथा, लालचंदन, गाय के घी, गेंदा, गुलाब के फूल और गाय का गोबर से हर्बल धूप और अगरबत्ती तैयार कर अपनी आर्थिकी मजबूत कर रही हैं। ऐसा कर इन महिलाओं ने अन्य को भी स्वरोजगार की राह दिखाई है। इन उत्पादों को महिलाएं मांग के मुताबिक नाचनी, मुनस्यारी और जिला मुख्यालय के बाजारों में बेचती हैं। गीता देवी ने बताया कि हर्बल धूप और अगरबत्ती की अच्छी मांग होने से बाजार की कमी भी नहीं खल रही है। उन्होंने कहा कि वह अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने का प्रयास करेंगी।
जड़ी-बूटियाें से बने धूप की मांग अधिक
स्थानीय बाजार में पारंपरिक जड़ी-बूटियों से बने धूप की काफी मांग है। महिलाएं मांग को देखते हुए स्थानीय जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक सामग्री से निर्मित हर्बल धूप को तैयार करने का कार्य कर रही हैं। संगठन की यह पहल गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और पर्यावरण के सरंक्षण को भी बढ़ावा दे रही है।