छियालेख में छाए धुंध की बाधा को पार कर वायुसेना के हेलीकॉप्टर नैनीसैनी हवाई पट्टी से 15वें दल के 18 सदस्यों को लेकर गुंजी पहुंचे। गुंजी से दसवें दल के सात और 11वें दल के 19 सदस्यों को पिथौरागढ़ लाया गया। सभी सदस्य दिल्ली रवाना हो गए हैं।
शुक्रवार सुबह मौसम साफ रहने पर वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने कैलाश यात्रियों को लेकर नैनीसैनी हवाई पट्टी से गुंजी के लिए उड़ान भरी। सुबह 9.05 बजे पहला हेलीकॉप्टर गुंजी में उतरा। वहां से 10वें दल के सात यात्रियों को लेकर नैनीसैनी पहुंचा। इसके बाद दूसरे हेलीकॉप्टर ने गुंजी के लिए उड़ान भरी और 11वें दल के 19 यात्रियों को पिथौरागढ़ लाया गया। दसवें दल के भी चार सदस्य पिथौरागढ़ में ही रुके थे। सभी 30 यात्री दिल्ली रवाना हो गए हैं।
इससे पहले यात्रियों का नैनीसैनी हवाई पट्टी में केएमवीएन के नोडल अधिकारी दिनेश गुरुरानी के नेतृत्व में स्वागत किया गया। आईटीबीपी सातवीं वाहिनी मिर्थी कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार 13वें दल के यात्री वापसी में कालापानी से गुंजी आ गए हैं। 14वें दल के यात्रियों ने मानसरोवर की परिक्रमा कर हवन-यज्ञ किया।
17वें और 18वें दल का भी शेड्यूल तय
पिथौरागढ़। कैलाश मानसरोवर यात्रा में मौसम की बाधाओं के बीच 17वें और 18वें दल का शेड्यूल तय हो गया है। कयास लगाए जा रहे थे कि दोनों दलों की यात्रा निरस्त हो सकती है। केएमवीएन के जीएम टीएस मर्तोलिया ने बताया कि यात्रा का 17वां दल दो सितंबर को और 18वां दल छह सितंबर को काठगोदाम पहुंचेगा। दल में कितने यात्री हैं, अभी यह तय नहीं है। दिल्ली में एक-दो दिन में मेडिकल जांच के बाद यात्रियों से यात्रा शुल्क जमा कराया जाएगा। इसके बाद ही यात्रियों की संख्या का पता लग पाएगा।
हेलीकॉप्टर सेवा से हुआ विलंब
पिथौरागढ़। गुंजी से पहुंचे 10वें दल के पश्चिमी बंगाल के यात्री अरविंदो मलिक ने बताया कि यात्रा में करीब 45 दिन के विलंब के बाद भगवान भोलेनाथ की नगरी के दर्शन हुए। उन्हें अगस्त में ही यात्रा पूरी कर दिल्ली पहुंच जाना था, लेकिन मौसम की बाधा के चलते दिक्कत हुई। उनका वीजा आठ अगस्त को खत्म हो गया था। वीजा मिलने के बाद 17 अगस्त को उन्होंने चीन में प्रवेश किया। उन्होंने उच्च हिमालयी क्षेत्र में सुरक्षा में तैनात आईटीबीपी और केएमवीएन की खासी सराहना की।
विलंब के बावजूद सुखद रही यात्रा
पिथौरागढ़। चेन्नई के राजगोपालन ने कहा कि यात्रा में विलंब के बावजूद यह सुखद रही। यदि मौसम साथ देता तो वह समय पर यात्रा पूरी कर पाते। उन्होंने व्यवस्थाओं पर संतोष जताया।
केएमवीएन की व्यवस्था ठीक, सरकार की नहीं
पिथौरागढ़। कोटा राजस्थान के यात्री धर्मेंद्र उपाध्याय ने कहा कि उन्हें पूरी यात्रा में 45 दिन का समय लगा। कैलाश यात्रा में हेली सेवा के चलते विलंब हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को समय पर अपनी व्यवस्थाएं दुरुस्त रखनी चाहिए थीं। यदि गुंजी तक का पैदल रास्ता ठीक होता तो उन्हें कोई दिक्कतें नहीं होती। उन्होंने कहा कि चीन ने लिपुलेख तक सड़क बना ली है, लेकिन हम पैदल रास्ते तक ठीक नहीं कर पाए। कहा कि यात्रा में विलंब के चलते केएमवीएन को खासा नुकसान उठाना पड़ा है। बावजूद इसके व्यवस्थाओं में कोई कमी नहीं होने दी। यदि इतने दिन यात्रियों को अपने खाने और रहने की व्यवस्था खुद करनी होती तो बहुत मुश्किल हो जाती। उन्होंने कहा कि भारत में रहने, खाने और सुरक्षा की जो व्यवस्था थी चीन उसका मुकाबला नहीं कर सकता। चीन में उन्होंने खाने का सामान खरीदा। कुक ने जैसा बनाया जबरन उसे खाना पड़ा।