थल में रामगंगा के किनारे फैलाया गया कूड़ा
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थल में मुख्य बाजार से हटकर यदि आसपास के इलाकों पर नजर दौड़ाई जाए तो पता चलेगा कि जैसे रामगंगा सिर्फ कूड़ा निस्तारण का माध्यम बनकर रह गई है। जिसे जहां मौका मिला, वह वहीं पर कूड़ा फेंक देता है। यदि एक स्थान पर किसी ने कूड़ा डाला तो दूसरे लोग उसे रोकने के बजाए खुद भी उसी राह पर चल पड़ते हैं। जिला पंचायत व्यापारियों से सुविधा देने, सफाई की व्यवस्था करने के नाम पर टैक्स तो लेती है, लेकिन कभी सफाई नहीं करती। आठ हजार की आबादी वाले इस कस्बे में कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। या तो लोग खुले में कूड़ा फेंक देते हैं या फिर उसे नदी में प्रवाहित कर देते हैं।
थल बाजार से यदि मुवानी रोड और डीडीहाट रोड की तरफ देखा जाए तो कई जगह कूड़े के डंपिंग जोन बन गए हैं। वर्षों से यह कूड़ा डाला जा रहा है और उसमें नए कूड़े की परत चढ़ती जा रही है। कुछ स्थान तो ऐसे हो गए हैं कि करीब 50 मीटर के दायरे में सिर्फ कूड़ा दिखता है। यह कूड़ा धीरे-धीरे नदी की ओर बहता है। थल बाजार में ही करीब एक दर्जन स्थान ऐसे हैं, जहां से कूड़ा सीधे रामगंगा में जाता है। लोगों का कहना है कि जिला पंचायत टैक्स के बदले एक कूड़ा निस्तारण स्थल ही बना देती तो नदी में कूड़ा जाने से बच जाता।
थल को नगर पंचायत का दर्जा दें
स्थानीय निवासी कुंदन राम का कहना है कि गंदगी से मुक्ति का एक ही उपाय है कि थल को नगर पंचायत का दर्जा मिलना चाहिए। यदि नगर पंचायत बन जाती तो सफाई व्यवस्था सही होती और कूड़ा निस्तारण के लिए भी इंतजाम हो जाता। अब थल के लोगों को सबसे पहले नगर पंचायत गठन की मांग करनी चाहिए।
कूड़ा निस्तारण के तरीके बताने होंगे
थल निवासी महेश पाठक का कहना है कि जब तक लोग खुद जागरूक नहीं होंगे, तब तक नदियों का संरक्षण संभव नहीं है। किसी संगठन को इसके लिए आगे आना पड़ेगा और लोगों को कूड़ा निस्तारण के तरीके बताने होंगे। इससे सभी के बीच संदेश पहुंचेगा। इसके लिए सबसे पहले एक जागरूक संगठन बनाना होगा।
कूड़ा निस्तारण की योजना बनेगी
तहसील प्रशासन ने जैविक और अजैविक कूड़े के निस्तारण के लिए योजना बनाने का फैसला लिया है। तहसीलदार रघुवीर सिंह ने कहा है कि एसडीएम के माध्यम से इस आशय का प्रस्ताव डीएम को भेजा जाएगा।