बैकुंठ धाम डीडीहाट में कुंएं से पानी का लिफ्ट करने के लिये लगाई गई मोटर।
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डीडीहाट/पिथौरागढ़(संजू पंत)। कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों...। जी हां बैकुंठ धाम गीता योग सेंटर ट्रस्ट ने इस कथन को सच करके दिखाया है। तीस साल के भगीरथ प्रयास से ट्रस्ट ने धाम की 10 नाली से अधिक बंजर जमीन को हरा भरा कर दिया। पौधों के पेड़ बनते-बनते इस बंजर जमीन से जलधारा भी फूटने लगी है।
1972 में स्थापित बैकुंठ धाम के पास छनपट्टा तोक में 10 नाली जमीन से अधिक की भूमि पूरी तरह से बंजर थी। यहां पानी की कोई व्यवस्था भी नहीं थी। बैकुंठ धाम के संस्थापक योगी भाष्कर स्वामी ने यहां रहने के लिए एक छोटी कुटिया का निर्माण कराया। वह 500 मीटर दूर स्थित सिराकोट धारे से पानी लाए और हर वर्ष वर्षाकाल में 500 से अधिक बांज व उतीस के पेड़ लगाने शुरू कर दिए। 2003 तक यहां अच्छा-खासा जंगल स्थापित हो गया और 2007 में इसी बंजर भूमि में जलधारा फूट गई। संवाद
रोजाना उपलब्ध होता है 2000 ली. पानी
बैकुंठ धाम ट्रंस्ट के मैनेजिंग डायरेक्टर डीएस पांगती बताते है कि जब बंजर भूमि में जलधारा फूटी तो ट्रस्ट ने यहां 18 फुट का कुआं खोदा। कुएं में एक ही दिन में काफी पानी एकत्र होने लगा। अब इस कुएं से बैकुंठ धाम में रोजाना एक से दो हजार लीटर पानी उपलब्ध हो जाता है।