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वीरों का गांव है सुगड़ी

Wed, 09 Aug 2017 10:49 PM IST
दिगंबर रौतेला/अमर उजाला, गंगोलीहाट
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शहीद गोपाल सिंह की वीरांगना देवुली देवी सेना मेडल ग्रहण करती - फोटो : अमर उजाला
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मां भारती के लाल पवन सुगड़ा का गांव वीरों का गांव है। इस गांव के तीन वीरों ने चीन और पाकिस्तान के साथ हुई लड़ाई में जान दी है। कारगिल युद्ध के दौरान सुगड़ी के पड़ोसी गांव नैनोलीकैणा के एक जांबाज ने भी देश के लिए शहादत दी है।
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वर्ष 1962 में चीन के साथ हुई लड़ाई में 8 सितंबर 1965 को सुगड़ी के लांस नायक देव सिंह (कुमाऊं रेजीमेंट) ने, वर्ष 1971 की भारत-पाक लड़ाई में 30 नवंबर 1971 को सुगड़ी के सिपाही मदन सिंह (कुमाऊं रेजीमेंट) ने शहादत दी। इसी गांव के बीएसएफ में तैनात गोपाल सिंह ने 17 दिसंबर 1971 को बांग्लादेश में शहादत दी। उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल से नवाजा गया। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध में सुगड़ी के पड़ोसी गांव नैनोली के नायक जीवानंद उप्रेती (कुमाऊं रेजीमेंट) 5 जून 1999 को कारगिल क्षेत्र में शहीद हुए थे। हालांकि सेना ने उनकी शहादत को युद्ध क्षेत्र से बाहर माना।

शहीद पवन का गांव गंगोलीहाट तहसील के बेलपट्टी में पड़ता है। बेलपट्टी में सुगड़ी, कैणा, नैनोली, कुंतोला, धराड़ी, पाली पल्याल, चौरपाल, सलाण, सेरागड़ा, नैचूना, बुसैल, सिनलेख, बुंगली, चहज, ड्यूलहाड़ाकोट, अस्कोड़ा, रौतेड़ा समेत कई गांव आते हैं। करीब 30,000 आबादी वाले बेलपट्टी के हर घर का भारतीय सेना में प्रतिनिधित्व है। कई घरों से दो-दो, तीन-तीन लोग सेना में कार्यरत हैं।
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आजादी की लड़ाई में भी इलाके की धमक 
शहीद पवन के गांव सुगड़ी के पड़ोसी गांव कैंणा के स्वर्गीय विशन सिंह नामी स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं। स्वाधीनता सेनानी विशन सिंह को बेहतर संगठनकर्ता माना जाता था। उनके नाम से अंग्रेजी हुकूमत कांपती थी। सेनानी विशन सिंह को वर्ष 1942 के स्वाधीनता आंदोलन के दौरान अंग्रेजी हुकूमत ने गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने छह महीने का कारावास भोगा।
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