पिथौरागढ़। जिला अस्पताल में तैनात पांच प्रमुख विशेषज्ञ चिकित्सकों को एक साथ स्वास्थ्य शिविर में ड्यूटी पर भेजने से चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर गई है। अस्पताल में एक साथ नेत्र सर्जन, ईएनटी सर्जन, फिजिशियन, हड्डी रोग और दंत रोग विशेषज्ञ के न मिलने से दूर-दराज से आए मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
धारचूला, डीडीहाट, मुनस्यारी, गंगोलीहाट और कनालीछीना जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचते हैं। मुख्य चिकित्सकों के कक्षों में ताले लटके रहने और शिविर में जाने के कारण ओपीडी में मौजूद अन्य डॉक्टरों के कक्षों के बाहर मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
लंबी कतारों और घंटों इंतजार के बाद भी कई मरीजों की बारी नहीं आई जिससे मजबूर होकर कई लोग निजी अस्पतालों का रुख करने को विवश हुए। आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण मरीजों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए मांग की है कि ऐसे शिविरों का आयोजन इस प्रकार किया जाए कि जिला अस्पताल की नियमित स्वास्थ्य सेवाएं बाधित न हों।
ओपीडी बंद कर करना पड़ा ऑपरेशन
जिला अस्पताल में दो नेत्र सर्जन तैनात हैं। एक को शिविर में भेज दिया गया। ऐसे में एकमात्र नेत्र सर्जन को मरीजों की जांच और ऑपरेशन की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। हालात यह रहे कि ओपीडी बंद कर नेत्र सर्जन को मरीजों का ऑपरेशन करना पड़ा। ऐसे में ओपीडी में पहुंचे कई मरीज निराश होकर घर लौटे।
जिला अस्पताल से पांच विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी स्वास्थ्य शिविर में लगाई गई है ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को लाभ मिल सके। जिला अस्पताल में तैनात अन्य चिकित्सक मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
-डॉ. डीपी सिंह, पीएमएस, जिला अस्पताल, पिथौरागढ़
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बोले मरीज
सुबह 11 बजे जिला अस्पताल इलाज कराने के लिए पहुंची। उन्हें काफी दिनों से बुखार और पेट में दर्द की समस्या हो रही थी। अस्पताल में तैनात एकमात्र फिजिशियन के कक्ष में पर्ची जमा कर दी। दो घंटे तक इंतजार करने के बाद भी नंबर नहीं आ सका। ऐसे में मजबूरन निजी अस्पताल जाना पड़ा। विशेषज्ञों को शिविर में भेजना सही नहीं है।
-हीरा देवी, बुंगाछीना
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उनके घुटनों में काफी दिनों से दर्द हो रहा था। जिला अस्पताल में भीड़ अधिक थी और विशेषज्ञ शिविर में गए थे। ऐसे में इंतजार के बाद भी इलाज नहीं मिला। निजी अस्पताल जाने के लिए भी धन की कमी है। ऐसे में रिश्तेदारों के यहां शरण लेकर विशेषज्ञ के आने का इंतजार करना पड़ेगा।
-चंचल सिंह, मदकोट