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विद्यार्थी जो किताब ले जाएगा उसकी समीक्षा भी लिखेगा

Wed, 13 Sep 2017 10:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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देवसिंह इंटर कालेज के पुस्तकालय में अध्ययन करते विद्यार्थी - फोटो : अमर उजाला
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देवसिंह राजकीय इंटर कॉलेज के पुस्तकालय से हर विद्यार्थी को महीने में दो किताबें पढ़ने के लिए दी जाती हैं। विद्यार्थी जब किताब को पुस्तकालय में जमा करेगा, उस समय वह एक पृष्ठ की समीक्षा भी लिखेगा कि जो पुस्तक उसने पढ़ी, उसके लेखक कौन हैं, पुस्तक में मुख्य रूप से किन बातों का उल्लेख है। यह क्रम लगातार जारी है और बच्चों की ओर से लिखी गई कई समीक्षाएं एकत्र भी हो गई हैं। बच्चों में पढ़ने की रुचि विकसित करने और घर पर जाकर किताब को जरूर पढ़ने के लिए यह अभियान चलाया गया।
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देवसिंह इंटर कॉलेज का पुस्तकालय रोज विद्यार्थियों के लिए खुलता है। इसमें अमर उजाला समेत सभी अखबार, अंग्रेजी के अखबार, स्थानीय साप्ताहिक समाचार पत्र नियमित आते हैं। पुस्तकालय में साहित्य, विज्ञान, लोक संस्कृति, सामान्य ज्ञान, प्रतियोगी परीक्षा, महापुरुषों की जीवनी पर आधारित किताबें हैं। इसके अलावा प्रतियोगिता दर्पण, विज्ञान परिचर्चा, ड्रीम नाम की पत्रिकाएं भी नियमित आती हैं। प्रधानाचार्य डा. अशोक कुमार पंत ने बताया कि एक शिक्षक को पुस्तकालय संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वह कहते हैं कि हर विद्यार्थी को हर महीने उसके पाठ्यक्रम से अलग दो-दो पुस्तकें जरूर पढ़ने को मिल जाती हैं। पिछले दिनों जिलाधिकारी सी रविशंकर ने भी प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए थे कि वह पुस्तकालय की पुस्तकें नियमित रूप से विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए दें।
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पूर्व विधायक ने दिए थे एक-एक लाख
पूर्व विधायक मयूख महर ने अपने विधानसभा क्षेत्र के 64 विद्यालयों को पुस्तकालय के लिए वर्ष 2014 में एक-एक लाख रुपये की राशि दी थी। इससे सभी विद्यालयों में पुस्तकों की संख्या काफी बढ़ गई। इसके अलावा राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) की मद से हर विद्यालय को हर साल दस-दस हजार रुपये की राशि पुस्तकालय के लिए दी जाती है।

विद्यार्थियों से लिया जाता है मात्र 10 रुपये वार्षिक
सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों से एक वर्ष में वाचनालय शुल्क के तौर पर मात्र दस रुपये लिए जाते हैं। यदि किसी विद्यालय में छात्रसंख्या कम हो तो यह राशि नाममात्र की रह जाती है। विद्यालयों में पुस्तकालयों को समृद्ध बनाने के लिए अन्य स्रोतों का ही सहारा लेना पड़ता है।
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