बस्तड़ी (पिथौरागढ़)। बस्तड़ी और उड़मा गांव के लोगों के मन में आपदा का खौफ इस कदर भर गया है कि वह अब तमाम असुविधाओं के बावजूद सात परिवार एक ही कमरे में रह रहे हैं। प्राथमिक पाठशाला के एक कमरे में उड़मा गांव के सात परिवारों के 35 लोग रुके हैं। इसी स्कूल के एक कमरे में एक परिवार रुका है। जीआईसी सिंघाली में बस्तड़ी के सात परिवारों ने शरण ले रखी है।
बस्तड़ी के जिन लोगों के शव मिल चुके हैं उनके परिजन क्रियाकर्म करने लगे हैं। क्रियाकर्म के लिए यह लोग सिंघाली बाजार में अपने रिश्तेदारों के यहां जाकर क्रियाकर्म की प्रक्रिया को कर रहे हैं। प्राथमिक स्कूल के एक कमरे में छोटे बच्चे, महिलाएं, पुरुष शामिल हैं। उनकी आंखों में भय की लकीर साफ दिखती है।
वह कहते हैं कि अब आसमान में बादल गहराने से ही दिल कांपने लगता है। प्राथमिक स्कूल में रुके अशोक कुमार, बसंती देवी, मदन राम, मंजू देवी, प्रतिमा देवी, जानकी देवी आदि ने कहा कि वह किसी भी सूरत में अपने घरों में नहीं जाना चाहते। प्रशासन तथा अन्य स्वयंसेवी संगठनों ने शरण लिए लोगों के लिए राशन, कपड़े, बर्तन, बिस्तर आदि की व्यवस्था कर रखी है।
तात्कालिक सहायता के तौर पर हर परिवार को आठ आठ हजार रुपये दिए गए हैं। तहसीलदार पीसी पंत ने कहा कि जीआईसी के सभी कमरे आपदा प्रभावितों के लिए खोले गए हैं। यदि कोई परिवार उनमें रहना चाहे तो रह सकता है। फिलहाल गांव के सभी लोग समूह में ही रह रहे हैं।