टनकपुर (चंपावत)। उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल मां पूर्णागिरि धाम में 30 मई 2027 तक रोपवे शुरू करने की तैयारी है। रोपवे का करीब 55 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। वर्तमान में लोवर और अपर टर्मिनल का निर्माण कार्य जारी है। रोपवे शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं को करीब छह किलोमीटर की पैदल दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। उन्हें केवल करीब 700 मीटर की सीढ़ियां चढ़कर मां के दरबार तक पहुंचना होगा।
करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से पीपीपी मोड पर बन रहे 950 मीटर लंबे रोपवे में दो ट्रॉलियां संचालित होंगी। प्रत्येक ट्रॉली में एक बार में 65 श्रद्धालु सफर कर सकेंगे। एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल तक करीब 250 मीटर की ऊंचाई का सफर लगभग सात मिनट में पूरा होगा।
रोपवे के संचालन से हनुमान चट्टी से काली मंदिर तक की करीब छह किलोमीटर की पैदल दूरी और सड़क मार्ग से आवागमन में कमी आएगी। इससे श्रद्धालुओं के साथ ही बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों को काफी सुविधा मिलेगी। खासकर बुजुर्ग श्रद्धालुओं को सीढ़ियां चढ़ने में होने वाली परेशानी से राहत मिलेगी। वर्तमान में कई श्रद्धालु सीढ़ियां चढ़ते-चढ़ते थक जाते हैं और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल तक पहुंचाना पड़ता है।
हनुमान चट्टी और काली मंदिर के बीच बनने वाले 950 मीटर लंबे रोपवे में किसी भी प्रकार का मध्य पोल नहीं लगाया जाएगा। रोपवे के निर्माण से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।
कार्यदायी संस्था केआर आनंद कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के मैनेजर महेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि रोपवे का निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा कर लिया जाएगा।