गणाईगंगोली के नियोलियासेरा में कुलूर नदी में बनाई गई सड़क।
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दो साल पहले ध्वस्त हुए पुल को अभी तक नहीं बनाया जा सका है। हाल यह है कि पुल न होने के कारण वाहन नदी तल से होकर गुजर रहे हैं। बरसात में यह आवागमन ठप हो जाता है और लोगों को भी यहां एक ट्राली के सहारे नदी पार करनी पड़ती है। अब लोगों ने आंदोलन की चेतावनी दी है और लोक निर्माण विभाग का कहना है कि बुधवार को भूमि की जांच के लिए टीम भेजी जा रही है।
रामपुर-नैनी सड़क के नियोलिया सेरा में बना पुल एक फरवरी 2017 को दो ट्रकों के गुजरते समय ध्वस्त हो गया था। पुल में बैठ कर धूप सेंक रहे दो युवकों को इस हादसे में हाथ धोना पड़ा था। तब सरकार और प्रशासन ने तीन महीने के भीतर पुल का पुनर्निर्माण करने की बात कही थी लेकिन आज की तिथि तक पुल का निर्माण सरकार नहीं करा पाई है।
पुल ध्वस्त होने के बाद से कुलूर नदी से वाहन संचालन हो रहा है। बरसात में कुलूर में पानी काफी बढ़ जाता है। जून से अगस्त तक तीन महीने सड़क में आवागमन बाधित रहता है। पुल न बनने से नियोलिया सेरा, नैनी, खिरमांडे क्षेत्र की 15000 की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हो जाती है। लोक निर्माण ने इस स्थान पर ट्रॉली लगाई है। ट्रॉली भी कई बार खराब हो जाती है। ग्राम प्रधान मोहन जोशी का कहना है कि पुल नहीं बनता है तो क्षेत्र के लोगों के साथ मिल कर आंदोलन छेड़ दिया जाएगा।
लोक निर्माण विभाग विश्व बैंक डिविजन के सहायक अभियंता प्रेम प्रकाश का कहना है कि नियोलिया सेरा में भूमि की जांच के लिए बुधवार की टीम पहुंचने वाली है। भूमि की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पुल के लिए निविदा आमंत्रित की जाएगी।