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कैलाश यात्रा मार्ग की दुर्दशा कभी चुनावी मुद्दा नहीं बनी

Fri, 10 Feb 2017 10:37 PM IST
कृष्णा गर्ब्याल/अमर उजाला, धारचूला
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इसी कठिन रास्ते से सफर करते हैं कैलाश मानसरोवर यात्री - फोटो : अमर उजाला
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वैसे उत्तराखंड के लोग खुद इस बात के लिए गौरवान्वित महसूस करते हैं कि उनके इलाके से होकर विश्व प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा का संचालन होता है। हर साल यात्रा संपन्न होने के बाद कई एजेंसियां अपनी पीठ थपथपाती हैं, लेकिन हकीकत में देखा जाए तो राज्य गठन के बाद यात्रा मार्ग की दशा सुधारने की कोई पहल ही नहीं हुई। आज भी यात्रियों को खतरनाक पैदल रास्तों से सफर करना पड़ता है। यात्रियों को वाहन की सुविधा कब मिलेगी, कहा नहीं जा सकता। इस चुनाव में किसी भी दल ने यात्रा मार्ग की दुर्दशा को अपने एजेंडे में शामिल नहीं किया है।
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यात्रा मार्ग पर लखनपुर से बूंदी तक खड़ी चट्टानों के नीचे से होते हुए आवाजाही करने वालों के लिए हमेशा खतरा रहता है। आज भी नारायणआश्रम से आगे जाने के लिए कैलाश यात्रियों को खतरनाक रास्तों को पार करना पड़ता है। पैदल रास्ते दुरुस्त नहीं हैं। घोड़े और खच्चरों को इन रास्तों से लेकर जाना कम जोखिम भरा नहीं है। 2016 में एशियन डेवलपमेंट बैंक के माध्यम से खड़ंजायुक्त मार्ग बनाने के लिए लाखों रुपए स्वीकृत हुए, लेकिन कुछ मीटर तक खड़ंजा मार्ग बनाने के बाद काम छोड़ दिया गया। इतने दूर के इलाकों में होने वाली अंधेरगर्दी पर अफसरों की नजर इसलिए नहीं जा पाती, क्योंकि वहां तक अधिकारी पहुंच ही नहीं पाते। ठेकेदारों और काम करने वाली एजेंसियों की ही क्षेत्र में मनमानी चलती है।

कार्यकर्ताओं को रोजगार देने की चिंता
क्षेत्र के युवा समाजसेवी वीरेंद्र नपलच्याल कहते हैं कि कई वर्षों से स्थानीय लोग रोड बनने तक कम से कम पैदल मार्ग को दुरुस्त करने की मांग करते रहे हैं, लेकिन यात्रा मार्ग को सुधारने के बजाए राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ताओं को रोजगार देने के लिए सारे सरकारी महकमे लगे रहते हैं। यही कारण है कि लाखों रुपया खर्च होने के बाद भी रास्ते नहीं सुधर पाए हैं। 
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लखनपुर से गर्ब्यांग तक सड़क बनाएं 
व्यापारी जगदीश गर्ब्याल कहते हैं कि गर्ब्यांग से कालापानी तक मोटर मार्ग बनाने का तब तक फायदा नहीं है, जब तक लखनपुर से गर्ब्यांग तक 28 किमी सड़क को लिंक नहीं किया जाता है। जनप्रतिनिधियों और सरकारों को सबसे पहले सीमांत तक सड़क बनाने की सोचनी चाहिए। उसका लाभ यात्रियों और स्थानीय लोगों को मिलने लगेगा। 
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