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Uttarakhand: अटपटे नाम के कलंक से मुक्त हुआ खूनी...अब कहलाएगा देवीग्राम, पिथौरागढ़ जिले के गांव का नाम बदला

Wed, 20 Aug 2025 01:17 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़

सार

पिथौरागढ़ जिले का खूनी गांव अब देवीग्राम के नाम से पहचाना जाएगा। जिला मुख्यालय के नजदीक नैनीसैनी क्षेत्र से सटे इस गांव का नाम बदलने की अधिसूचना सरकार की ओर से जारी कर दी गई है। वर्षों पुरानी यह मांग पूरी होने से ग्रामीणों में खुशी है।
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सांकेतिक तस्वीर।
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विस्तार
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अब आम बोलचाल की भाषा में सबको चौंकाने और अपनी तरफ ध्यान आकर्षित करने वाला खूनी गांव देवीग्राम के नाम से पहचाना जाएगा। जिला मुख्यालय के नजदीक नैनीसैनी क्षेत्र से सटे इस गांव का नाम बदलने की अधिसूचना सरकार की ओर से जारी कर दी गई है। वर्षों पुरानी यह मांग पूरी होने से ग्रामीणों में खुशी है।

नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान इंद्रा जोशी ने बताया कि खूनी गांव का नाम बदलने की मांग ग्रामीण लंबे समय से कर रहे थे। इसके लिए ग्रामीणों ने कई आंदोलन भी किए। यह मांग करने वाले कई बुजुर्ग दुनिया छोड़कर चले गए। इस गांव के रहने वाले वर्तमान में मुंबई निवासी ओएनजीसी के पूर्व महाप्रबंधक एवं कारपोरेट संचार विशेषज्ञ ललित मोहन जोशी ने गांव का नाम बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ग्रामीणों के साथ ही उनका संघर्ष और मुहिम रंग लाई है। शासन की अधिसूचना जारी होने से ग्रामीणों में खुशी है। ग्रामीणों ने सरकार का आभार जताया है।

झड़प में मारे गए अंग्रेज तो खूनी गांव नाम पड़ गया

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किंवदंतियों के मुताबिक गांव का नाम खूनी पड़ने के पीछे अंग्रेज सैनिकों के मारे जाने की बात हो सकती है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस गांव के आंदोलनकारियों ने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन छेड़ा था। ग्रामीणों और अंग्रेजों के बीच झड़प हुई जिसमें कुछ अंग्रेज सैनिक मारे गए। ग्रामीणों के मुताबिक, हो सकता है तक से इस गांव को खूनी गांव कहा जाने लगा होगा।

बोले ग्रामीण
सभी ग्रामीण गांव का नाम बदलने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे। आखिरकार उनके संघर्ष की जीत हुई है। मां मालिकेश्वरी भगवती देवी की भूमि पर बसे हमारे गांव को देवीग्राम के नाम से पहचान मिली है। इसके लिए मैं और सभी ग्रामीण सरकार का आभार व्यक्त करते हैं। - इंद्रा जोशी, प्रधान

हम अपने गांव का नाम काफी समय से बदलवाना चाह रहे थे। इसके लिए गांव के बुजुर्गों ने भी खूब संघर्ष किया। इनमें से कई लोग अब दुनिया में नहीं हैं। गांव का नाम बदलना उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि है। सरकार ने हमारी बात सुनी, इसके लिए आभार जताते हैं। - आनंद बल्लभ जोशी

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