उत्तरायणी पर्व पर मायूस बैठे कुमालगौनी के आपदा प्रभावित
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30 जून 2016 की आपदा में गांव के तीन लोगों को खोने वाले कुमालगौनी के आपदा प्रभावितों को घुघुतिया का पर्व घर से दूर नाचनी के बहुउद्देश्यीय भवन में मनाना पड़ रहा है। हालांकि, आपदा प्रभावितों में पर्व को लेकर कोई उल्लास, उत्साह नहीं है। क्योंकि उनका गांव अब रहने लायक नहीं रह गया है। प्रभावितों को मकान बनाने के लिए भी नाममात्र की रकम मिली है, जमीन का आवंटन नहीं हुआ है।
भूस्खलन से मकान ढहने से गांव के बची राम (48) उनकी पत्नी पार्वती देवी (42), पुत्र मनोज कुमार (20) की मृत्यु हो गई थी। हादसे में बची राम की मां हरुली देवी, पुत्र कमलेश (16), ललित (14), पुत्री निर्मला (12) की जान दूसरे कमरे में सोए होने के कारण बच गई थी। कुमालगौनी गांव के पांच परिवारों के मकान भूस्खलन से रहने लायक नहीं रह गए हैं। इन पांचों परिवारों को बहुउद्देश्यीय भवन में ठहराया गया है। पांचों परिवारों के 18 लोग तीन कमरों में ठंड में रातें गुजार रहे हैं।
बची राम की वृद्धा मां हरुली देवी (84) का कहना था कि पर्व क्या मनाएं, हादसे ने पुत्र, बहू और एक जवान पोते को छीन लिया। सरकार रहने तक का ठिकाना अब तक उन लोगों को नहीं दे पाई है। बच्चों की वजह से प्रतीकात्मक पर्व वह लोग मनाएंगे। आपदा प्रभावित बहादुर राम, गोपाल राम, दीवानी राम, महेश राम ने बताया कि हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को सरकार ने 4-4 लाख रुपए दिए। मकान बनाने के लिए सभी परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से मात्र 101900-101900 रुपए मिले। यह रकम खर्च हो चुकी है। मकान बनाने के लिए बेड़ीनाग के कांडाकिरौली में जमीन देखी है। यह जमीन उन लोगों को आवंटित नहीं हुई है। जमीन आवंटन के साथ ही मकान बनाने के लिए रकम सरकार से मिलती तो वह लोग मकान बना लेते।