काली नदी के उद्गम स्थल कालापानी में जमी बर्फ। स्रोत:एसएसबी।
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। उफान पर बहने वाली काली नदी बर्फबारी के बाद जम गई है और इसका प्रवाह लगभग थम गया है। हालात यह हैं कि उद्गम स्थल से 10 किलोमीटर नीचे तक काली का पानी पूरी तरह बर्फ में तब्दील हो गया है और इसका प्रवाह छोटे नाले के रूप में नजर आने लगा है।
भारत और नेपाल के बीच बहने वाली काली नदी के तेज प्रवाह के कारण इसे महाकाली नदी के रूप में जाना जाता है। अब इस नदी के प्रवाह को भारी बर्फबारी ने रोक दिया है। कालापानी के काली मंदिर के पास से निकलने वाली यह नदी के ऊपर उद्गम स्थल से आगे करीब आधा फुट बर्फ जमी है इसने पानी को पूरी तरह जमा दिया है। एसएसबी के मुताबिक काली नदी के जमने के पीछे बर्फबारी के बाद यहां का तापमान माइनस 35 डिग्री पहुंचना है। संवाद
काली जमी तो एसएसबी ने बढ़ाई चौकसी
काली नदी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा घेरे के रूप में काम करती है। काली को पार कर देश में घुसना अराजक तत्वों के लिए मुश्किल और चुनौती भरा होता है। अब काली नदी जमने से एसएसबी को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर चौकसी भी बढ़ानी पड़ी है। काली जमने और इसका प्रवाह कम होने से एसएसबी ने छारछुम से काला पानी तक हर बीओपी में चौकसी बढ़ाई है। हालांकि एसएसबी पूरी मुश्तैदी से सीमा सुरक्षा में डटी है।
अगले कुछ दिनों में और गिरेगी बर्फ
कालापानी के आसपास अगले कुछ दिनों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक यह संभावना प्रबल है। ऐसे में काली नदी का प्रवाह और कम होने की संभावना है। हालांकि ऐसा अगले कुछ समय तक ही होगा। मौसम अनुकूल होने और गर्मी बढ़ने के बाद बर्फ पिघलने से काली नदी फिर से अपने वास्तविक प्रवाह में बहने लगेगी।
कोट
बर्फबारी के बाद हिमालयी क्षेत्रों में तापमान माइनस 25 डिग्री से नीचे पहुंच गया है जो आम बात है। यही कारण है कि काली नदी के उद्गम स्थल में भी तापमान काफी नीचे गिरने से इसका पानी जम गया है। - डॉ. सीएस तोमर, निदेशक, मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून