जिले के जंगल बृहस्पतिवार को भी आग से धधकते रहे। इससे वन संपदा को जबर्दस्त नुकसान हुआ है। नाचनी, डीडीहाट, थल, बेड़ीनाग, अस्कोट के जंगलों में लगी आग से वातावरण में धुंध छाई है। इससे जहां लोगों में आंखों में जलन की शिकायत बढ़ी है, वहीं, पहाड़ पर गर्मी में भी इजाफा हुआ है।
नाचनी बांसबगड़ के सिविल वन और वन पंचायतों के जंगलों में जबर्दस्त आग लगी है। इससे वन विभाग के मुनस्यारी रेंज में करीब 40 हेक्टेयर जंगल जल गए हैं। रांया, बजेता, बांसबगड़, कोट्यूड़ा, चामी भैंसकोट, बाथीगूठ, मल्ला भेंसकोट, सेलमाली, दाखिम, कोटा, पंद्रपाला और अस्कोट मृग विहार से लगे गांव गूटी, धामीगांव, बरा के जंगलों में आग लगी है। डीडीहाट वन रेंज के नौलड़ा, मूर्ति, नापड़, खुनखुनिया, मालूझूला, बेड़ीनाग रेंज के कालीनाग बीट में आग लगी है। मुनस्यारी के रेंजर पूरन सिंह देउपा ने बताया कि आग पर नियंत्रण के प्रयास किए जा रहे हैं। जंगलों में लगी आग के बीच यह भी सामने आया है कि आग बुझाने में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कोई सहयोग नहीं मिल रहा है।
वहीं, डीडीहाट के घनधूरा, पमस्यारी के जंगल भी आग की चपेट में है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. दीपक कृपाल ने बताया कि पिछले तीन चार दिन में आंखों में जलन और अस्थमा से जुड़े मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। वन रेंजर राजेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि घनधूरा रेंज में लगी आग पर काबू पाने के लिए वन कर्मचारियों की टीमों को भेजा गया हैं।
थल के हजेती, कालीगाड़, हीपा के जंगल में बुधवार रात से लगी आग से 15 हेक्टेयर जंगल चुका है। रेंजर पुष्कर चंद्र जोशी ने बताया कि आग बुझाने का प्रयास किया जा रहा है। बेड़ीनाग नगर पंचायत के भट्टीगांव वार्ड की वन पंचायत में बृहस्पतिवार को अचानक आग लग गई। आग जीजीआईसी, नौलिंग मंदिर होते हुए क्वैराली की तरफ बढ़ गई। ग्रामीण आग पर काबू पाने का प्रयास कर रहे हैं। तहसील के कोटगाड़ी, कालीनाग मंदिर के जंगल में बुधवार देर रात आग लग गई। आग पर वनकर्मियों ने काबू पा लिया है। उप वन क्षेत्राधिकारी आरएस मेहरा ने बताया कि ग्रामीणों ने भी आग पर काबू पाने में सहयोग दिया।