फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैमरे की निगरानी में हो ऐतिहासिक किले का सुधारीकरण

Sat, 22 Aug 2015 06:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
शहर से चंडाक के लिए 88.76 लाख रुपये की लागत से बनाए जा रहे ट्रेकिंग रूट की खराब गुणवत्ता के चलते कुमाऊं कमिश्नर ने इसकी जांच बैठा दी, अब पिथौरागढ़ के ऐतिहासिक किले के सौंदर्यीकरण के काम में संस्था विवादों में घिर गई है। सीमांत यूथ मोर्चा ने संस्था पर ऐतिहासिक धरोहरों से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए सीसी टीवी कैमरे की निगरानी में किले के सौंदर्यीकरण की मांग उठाई है।
विज्ञापन

13वीं सदी में कत्यूरी शासक पिथौराशाही के शासनकाल में बने और 17वीं सदी में गोरखा शासनकाल का गवाह रहे ऐतिहासिक किले को इतिहास संग्रहालय का रूप दिया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने 4.54 करोड़ रुपये संस्था को दिए हैं। सौंदर्यीकरण के काम के चलते ऐतिहासिक धरोहरों, वस्तुओं को नुकसान पहुंचने की संभावना पहले से व्यक्त की जा रही थी, सीमांत यूथ मोर्चा की सक्रियता के कारण मामला चर्चा में आ गया।
मोर्चा के संयोजक सुशील खत्री ने डीएम विनोद गिरी गोस्वामी को सौंपे ज्ञापन में कहा है कि किले के भीतर जगह-जगह लोहे की तिजोरीनुमा ऐतिहासिक वस्तुएं हैं। मुख्य भवन के भीतर सुरंगनुमा तहखाने, सुरंग वाले रास्ते हैं, जिन्हें नुकसान पहुंचाया जा रहा है। एक तिजोरी से छेड़छाड़ की गई है। खत्री ने कहा कि कत्यूरी शासकों ने किले में दुश्मनों का प्रवेश रोकने के लिए किले के चारों ओर पत्थरों से सांप का बिल बनाया था, उसे भी खोद दिया गया है। कहा कि किले की खुदाई में और भी ऐतिहासिक वस्तुएं, दस्तावेज मिल सकते हैं, जिनका संरक्षण होना चाहिए। जिलाधिकारी ने किले में चल रहे निर्माण कार्य की निगरानी कराने की बात कही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें