पिथौरागढ़। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने वालों को सरकारी नौकरी देने के सपने तो दिखाए जा रहे हैं लेकिन बगैर कोच के खिलाड़ियों की प्रतिभा को कौन तराशे, इसकी चिंता नहीं दिखाई दे रही है। मानदेय के लिए बजट न होने से जिले में अनुबंध पर तैनात 28 प्रशिक्षकों कोे घर बैठा दिया गया है। ऐसे में जनपद के खिलाड़ी बगैर गुरु के खेलों के गुर सीखने के लिए मजबूर हैं।
जिले के आठों विकासखंडों में हर साल 780 खिलाड़ियों को एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, फुटबाल और बास्केटबाल का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके लिए 29 कोच तैनात किए गए थे। सिर्फ बास्केटबाल का प्रशिक्षण देने के लिए स्थायी प्रशिक्षक है। अन्य खेलों के लिए अनुबंध पर 28 कोचों की व्यवस्था की गई थी। इन्हें मानदेय देने के लिए पैसा नहीं है जिसके चलते इन्हें हटा दिया गया है। देश को कई अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय खिलाड़ी देने और मुक्केबाजी का गढ़ कहे जाने वाले सीमांत जिले की खेल प्रतिभाएं बगैर गुरु के सुनहरे भविष्य के सपने बुन रहे हैं।
प्रशिक्षकों को मिलता है कि 25 से 45 हजार रुपये महीना मानदेय
खेल विभाग के मुताबिक तीन कैटेगरी में प्रशिक्षकों को मानदेय मिलता है। डिप्लोमा प्राप्त प्रशिक्षक को सरकार की ओर से 45 हजार, इंटरनेशनल प्रतियोगिता में भाग लेने वाले को 35 और राष्ट्रीय खिलाड़ी को प्रशिक्षक बनने पर 25 हजार रुपये मानदेय दिया जाता है।
कांग्रेसी बोले- प्रशिक्षकों की तैनाती न होने पर होगा आंदोलन
प्रशिक्षकों को बाहर बैठाने पर कांग्रेस ने सरकार की खेल नीति पर सवाल उठाए हैं। पूर्व दायित्वधारी एवं जिला ओलंपिक संघ के अध्यक्ष महेंद्र लुंठी ने कहा कि बगैर प्रशिक्षक खिलाड़ी कैसे सफलता हासिल करेंगे। प्रशिक्षकों के मानदेय के लिए बजट न होना सरकार की खेल नीति पर प्रश्नचिह्न है। उन्होंने कहा कि जल्द प्रशिक्षकों की तैनाती नहीं हुई तो वे खिलाड़ियों को साथ लेकर जिला मुख्यालय में सरकार के खिलाफ धरना शुरू करेंगे।
कोट
अनुबंध पर तैनात खेल प्रशिक्षकों के मानदेय के लिए बजट नहीं मिला है। ऐसे में उन्हें फिलहाल सेवा से बाहर किया गया है। निदेशालय स्तर पर प्रशिक्षकों के मानदेय के लिए बजट की व्यवस्था हो गई है। जल्द ही उनका अनुबंध बढ़ाकर उन्हें तैनाती दी जाएगी। - अनूप बिष्ट, जिला क्रीड़ा अधिकारी, पिथौरागढ़