वन विभाग का फायर सीजन सोमवार से शुरू हो गया है। 15 जून तक जंगलों में आग की दृष्टि से हाई अलर्ट रहेगा। दावाग्नि रोकने के लिए 55 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं।
हर स्टेशन में कम से कम पांच कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इस तरह 275 कर्मचारियों की ड्यूटी जंगलों की आग को रोकने के लिए लगाई गई है। जिले के सात वन रेंजों में से पांच को दावाग्नि की दृष्टि से संवेदनशील घोषित किया गया है। सभी रेंजों में कर्मचारियों को फायर सीजन में अलर्ट के आदेश हो गए हैं।
प्रभागीय वनाधिकारी डा. आईपी सिंह ने सभी रेंजरों को आदेश दिए हैं कि जंगलों की आग को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं। इस दौरान फायर वाचर की तैनाती करने, स्कूलों के माध्यम से जागरूकता के अभियान चलाने और लोगों को जागरूक करने का कार्यक्रम चलेगा।
अक्सर लोग हरी घास के लालच में जंगलों में इरादतन आग लगा देते हैं। इस तरह की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले में इस बार सूखे की स्थिति को देखते हुए पहले से ही आग के लिए सतर्कता बरती गई थी। जंगलों में आग की छिटपुट घटनाएं पहले हुई भी हैं। पिछले सप्ताह 16.4 एमएम बारिश होने के बाद आग का खतरा कम हुआ है। अभी जमीन में नमी बनी है। इस कारण तत्काल आग की संभावना नहीं है।
आग की दृष्टि से संवेदनशील रेंज
पिथौरागढ़ जिले में 205239 हेक्टेयर में रिजर्व, सिविल और पंचायती जंगल हैं। इनमें से करीब 40 फीसदी हिस्से में चीड़ के जंगल हैं। चीड़ के जंगलों में आग का खतरा अधिक रहता है। इस कारण वन विभाग ने गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, डीडीहाट, अस्कोट और पिथौरागढ़ रेंज को आग की दृष्टि से संवेदनशील घोषित किया है। धारचूला और मुनस्यारी में जंगल ऊंचाई वाले इलाकों में होने के कारण आग का खतरा कम रहता है।
आग से छोटे पौधों और स्रोतों को खतरा
एक सामान्य गलती से जंगल में लगने वाली आग से छोटे पौधों और पेयजल स्रोतों को नुकसान पहुंचता है। पर्यावरण प्रदूषण को भी जंगल की आग बढ़ा देती है। विशेषज्ञों ने कई बार लोगों को आगाह किया है कि जंगलों में आग न लगाएं। अब तो इसके लिए सख्त कानून भी बन गए हैं। जंगलों में आग लगाते पकड़े जाने पर सजा हो सकती है।