कविता और सोनी की ओर से प्रधानमंत्री को भेजा गया पत्र
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माता-पिता का साया सिर से उठना अनाथ बहनों पर भारी पड़ रहा है। इंटर पास कविता और हाईस्कूल पास सोनी डॉक्टर बनना चाहती हैं ताकि भविष्य में किसी के माता पिता की इलाज के लिए पैसे न होने की वजह से मौत न हो। इनके माता-पिता की धन के अभाव में बिना इलाज मौत हो गई है। अब डॉक्टर बनने के सपने में भी गरीबी इनके आड़े आ रही है। दोनों बहनों ने अपने सपने को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार लगाई है।
डीडीहाट विकासखंड के खतेड़ा (नापड़) गांव के छोटे से किसान महेंद्र सिंह चुफाल एवं उनकी पत्नी नंदी देवी की बड़ी लड़की कविता और छोटी लड़की सोनी पढ़ने में बचपन से ही मेधावी रही हैं। अपनी इसी मेधा की वजह से दोनों को जवाहर नवोदय विद्यालय में प्रवेश मिला। पढ़ाई ठीक-ठाक चल रही थी, लेकिन दो साल पहले शुगर की बीमारी से मात्र 37 की उम्र में नंदी देवी का निधन हो गया। इसके बाद 43 वर्षीय महेंद्र सिंह जैसे-तैसे दोनों बेटियों को पढ़ा रहे थे कि पेट की बीमारी के कारण चार महीने पहले उनकी भी मृत्यु हो गई। गरीबी के कारण दोनों की बीमारी का इलाज नहीं हो सका।
93 प्रतिशत अंकों के साथ इंटर की परीक्षा पास कविता (17) और 81 प्रतिशत अंकों के साथ सीबीएसई से हाईस्कूल पास करने वाली सोनी पर माता-पिता की मृत्यु से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। माता-पिता की मृत्यु के बाद पांखू (चौसाला) निवासी मामा लक्ष्मण सिंह कार्की दोनों बच्चियों की देखभाल कर रहे थे लेकिन बेरोजगार लक्ष्मण सिंह भी अब दोनों बालिकाओं की मदद करने में लाचार हो गए हैं। दोनों बच्चियों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी बूढ़े दादा चनर सिंह, दादी लछिमा देवी के सिर पर है। सोनी जवाहर नवोदय में कक्षा 11वीं की छात्रा है। जवाहर नवोदय विद्यालय में पढ़ाई, आवास, भोजन व्यवस्था मुफ्त होने से बच्चियों को राहत मिली। वहां से आगे की पढ़ाई मेधावी बच्चियों के बूते की बात नहीं है।
दोनों बच्चियों ने प्रधानमंत्री मोदी के रेडियो पर मन की बात से प्रेरित होकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पढ़ाई और भरण-पोषण की गुहार लगाई है। वहीं, पुंगराऊं घाटी के सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश आर्या कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ ही समाजसेवियों, स्वैच्छिक संगठनों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं आदि को कविता और सोनी के सपने पूरे करने के लिए आगे आना चाहिए।