कसाड़ी गांव के आपदा प्रभावितों का एक साल पांच महीने बाद भी पुनर्वास नहीं हुआ है। बादल फटने से गांव में एक महिला की मौत हो गई थी, उसका पति घायल हो गए था। हादसे में छह परिवार बेघर हो गए थे, इन लोगों ने सुनेती गांव में शरण ले रखी है।
2 अगस्त 2014 को थल के कसाड़ी गांव में रात दस बजे बादल फटने से भागीरथी देवी की मौत हो गई थी। भागीरथी देवी के पति आनंद बल्लभ पाठक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। एक भैंस, दो गाय, नौ बकरियां भी जिंदा दफन हो गई थी। इस परिवार को मुआवजा मिल गया है। गांव के ही राजेंद्र पाठक, रमेश पाठक, हरीश पाठक, मेहर सिंह, प्रकाश चंद्र पाठक, आन सिंह के मकानों को भी भारी क्षति पहुंची थी। इन परिवारों ने 4 किमी दूर सुनेती गांव में शरण ले रखी है।
सरकार ने इन परिवारों की पुनर्वास की अब तक कोई व्यवस्था नहीं की है। मुआवजे के नाम पर 500-500 रुपये चेक आए थे, जो इन परिवारों ने नहीं लिए। प्रभावित परिवारों ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर विस्थापन की व्यवस्था करने की मांग की है। पुगराऊं घाटी एकता मंच के उपाध्यक्ष अर्जुन रावत ने इन लोगों के लिए तत्काल मकान की व्यवस्था करने की मांग की है।
आपदा के समय कसाड़ी गांव बेड़ीनाग तहसील में शामिल था। प्रभावितों की फाइल बेड़ीनाग तहसील में होगी, उसका अध्ययन किया जाएगा, मुआवजे और पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी। -पूरन चंद्र पंत, तहसीलदार