इस बार उम्मीद की जा रही थी कि शायद प्रशासन, जिला पंचायत या फिर अन्य एजेंसियां थल मेला शुरू होने से पहले रामगंगा की सफाई करेंगे और गंदगी को हटाने का प्रयास करेंगे। 13 अप्रैल से शुरू हुआ मेला 15 अप्रैल को संपन्न हो गया, लेकिन किसी का ध्यान नदी की गंदगी की तरफ नहीं गया। अमर उजाला में नदी की गंदगी को लेकर लगातार खबरें छपने के बाद भी किसी एजेंसी ने सफाई का प्रयास नहीं किया, जबकि तहसीलदार रघुवीर सिंह ने कहा था कि मेला शुरू होने से पहले नदी के किनारों की सफाई की जाएगी। व्यापारियों ने संसाधनों की कमी बताकर सफाई का कोई अभियान नहीं चलाया।
थल में रामगंगा इतनी गंदी है कि उसका पानी मुंह में डालने से भी लोग डरते हैं। नहाने के लायक भी नदी का पानी नहीं रह गया है। नाचनी से आगे जब यह नदी बढ़ती है तो इसमें गंदगी पटनी शुरू हो जाती है। थल में पहुंचते ही नदी के तटों पर गंदगी का अंबार लग जाता है। मानसून सीजन में जब नदी लबालब भरी रहती है, तब यह गंदगी खुद साफ हो जाती है, लेकिन पानी का स्तर कम होते ही नदी की गंदगी पटती रहती है। थल के पास रामगंगा में जितने भी छोटे नाले मिलते हैं, वह सभी गंदगी को लेकर आते हैं। यह सारी गंदगी नदी में गिरती रहती है।
प्रशासन जागता तो लोग सजग हो जाते
स्थानीय निवासी बुजुर्ग कलावती देवी का कहना है कि यदि एक बार प्रशासन सफाई अभियान चलाए और लोगों को गंदगी करने पर कानून का भय दिखाए तो शायद नदी की दशा सुधर सकती है। आश्चर्य होता है कि
कसी ने भी पहल नहीं की। प्रशासन जागता तो लोग भी सजग हो जाते।
गंदगी फैलाने के लिए लोग जिम्मेदार
स्थानीय निवासी जया ओझा का कहना है कि गंदगी फैलाने के लिए लोग ज्यादा जिम्मेदार हैं। किसी को भी यह चिंता नहीं है कि नदी में गंदगी जाने से कितना नुकसान होगा। पहले लोगों को जागरूक करना पड़ेगा। तब जाकर नदी को गंदगी से बचाया जा सकता है। पहले लोगों को जागरूक करना होगा।
नदी की पवित्रता को बनाए रखना होगा
थल निवासी रमा जोशी का कहना है कि पवित्र नदियों का गंदा होना दुखद है। इन नदियों का धार्मिक महत्व भी है। नदी के किनारे शिव का मंदिर है। लोग इसी पानी से मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। अब नदी को शीघ्र गंदगी से मुक्त करना होगा और नदी की पवित्रता को बनाए रखना होगा।
नदियों की चिंता किसी को नहीं
थल निवासी दीपा रौतेला का कहना है कि गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ दंड का विधान होना चाहिए। आज सभी जगह नदियों की पवित्रता की बात हो रही है, लेकिन पहाड़ की नदियों को देखकर लगता है कि इन जीवनदायिनी नदियों की किसी को चिंता नहीं है।