आंवलाघाट पेयजल योजना के जजुराली पंप हाउस का निरीक्षण करते जिलाधिकारी
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नगर में पेयजल की कमी और गंदे पानी की आपूर्ति के बीच डीएम ने आंवलाघाट योजना का निरीक्षण किया। इस दौरान योजना के संचालन मेें कई खामियां पकड़ी गई। योजना के पंप 24 घंटे के बजाय 10 से 12 घंटे तक ही चलते मिले। योजना के तहत निर्माण कार्य भी समय से पूरे नहीं हो सके। डीएम ने जल्द से जल्द काम पूरा करने की हिदायत दी है।
शनिवार को डीएम सी रविशंकर नवनिर्मित आंवलाघाट पेयजल योजना का निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान पंप हाउस के संचालन में खामी पकड़ी गई। बांस में पंप 24 घंटे चलते नहीं मिले। पानी की पंपिंग का समय लॉगबुक में भी अंकित नहीं मिला। पाया गया कि 10 से 12 घंटे की पंपिंग हो रही है। इससे नगर को पूरा पानी नहीं मिल पा रहा है। डीएम ने 24 घंटे पंपिंग के साथ ही पंप हाउस पर ऑपरेटर की नियमित नियुक्ति के निर्देश दिए।
जजुराली पंप हाउस के निरीक्षण के दौरान चहारदीवारी नहीं मिली। बाइपास चैंबर का काम भी नहीं किया गया था। ट्रांसफार्मर स्थल पर भी अधूरा काम मिला। डीएम ने जल संस्थान को पानी के नियमित सैंपल लेने और जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। इस दौरान जल निगम, जल संस्थान, लोनिवि आदि विभागों के अधिकारी थे।
तीसरे दिन भी घरों में आया गंदा पानी
नवनिर्मित आंवलाघाट योजना से तीसरे दिन भी लोनिवि जोन के घरों में गंदा पानी आया। इससे नगर के कई क्षेत्रों में पेयजल समस्या बनी रही। क्षेत्रवासियों को नौलों, धारों और स्टैंडपोस्ट से पीने का पानी भरना पड़ा। शनिवार को जल संस्थान ने आंवलाघाट से पानी लेकर लोनिवि टैंक के जरिये खड़कोट, सेरा, घंटाकरण, बैंक रोड, सिल्थाम आदि क्षेत्रों में आपूर्ति की थी, लेकिन गंदे पानी के चलते लोगों ने पेयजल के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया। कम पानी मिलने से डिग्री कॉलेज, जीआईसी रोड, सरस्वती विहार, पांडेगांव, जगदंबा कालोनी, घंटाकरण आदि क्षेत्रों में परेशानी का सामना करना पड़ा।