पिथौरागढ़। रोडवेज के पिथौरागढ़ डिपो में कर्मचारियों की कमी के बीच यात्री खटारा बसों से सफर करने को मजबूर हैं। डिपो को करीब 30 नई बसों की जरूरत है जिसके अभाव में सड़कों पर दौड़ रहीं पुरानी बसें रास्ते में कहीं भी हांफ रही हैं। इस कारण यात्रियों को टुकड़ों-टुकड़ों में यात्रा करनी पड़ रही है। दूसरी ओर दिवाली से ठीक पहले 20 से अधिक बसें खड़ी होने की कगार पर हैं।
जानकारी के मुताबिक बीते सोमवार को पिथौरागढ़ से देहरादून जा रही बस यूके 07 के 4277 का लोहाघाट के पास ब्रेकडाउन हो गया। किसी तरह बस को लोहाघाट डिपो पहुंचाकर दूसरी बस यात्रियों को रवाना किया गया। पुरानी बसों के सहारे चल रहा पिथौरागढ़ डिपो किसी तरह विभिन्न रूटों पर संचालन बनाए हुए है लेकिन जनशक्ति की कमी के बीच यह व्यवस्था बार-बार पटरी से उतर जा रही है।
डिपो को वर्तमान में 20-20 चालक और परिचालकों की जरूरत है। लिपिकीय स्टाफ की भारी कमी है। इन परिस्थितियों में टायरों और अन्य सामग्री की बार-बार कमी कोढ़ में खाज की तरह सामने आ रही है। टायरों के अभाव में वर्कशॉप में बसें खड़ी होने लगी हैं। सूत्रों के मुताबिक डिपो को 50 नए और 100 रबर चढ़े टायरों की जरूरत है। टायर और अन्य सामग्री की आपूर्ति जल्द नहीं हुई तो दिवाली से ठीक पहले 20 से अधिक बसों संचालन ठप हो सकता है।
सामग्री की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था लड़खड़ाई
परिवहन निगम के टनकपुर मंडल में तकनीकी के उच्च पदों पर वैकल्पिक रूप से काम चलाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक गैर तकनीकी फील्ड के अधिकारी इन पदों पर होने से विभिन्न डिपो को जरूरत के हिसाब से सामग्री की आपूर्ति और वितरण नहीं हो पा रहा है। टनकपुर सहित कुछ अन्य मंडलों में भंडारपाल और सहायक भंडारपाल के पद भी रिक्त चल रहे हैं। ऐसे में सामग्री की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था लड़खड़ाई हुई है।
वेतन के लाले और बस संचालन बनाए रखने की चुनौती
विपरीत परिस्थितियों के बीच पिथौरागढ़ डिपो के कर्मचारियों को वेतन के भी लाले पड़े हैं। कर्मचारियों का तीन माह का वेतन बकाया है। पुरानी बसों, टायरों और स्पेयर पार्ट्स का लगातार अभाव और वेतन के लिए तरसते कर्मचारियों के लिए बसों का संचालन सुचारु बनाए रखना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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विभिन्न डिपो में तकनीकी का काम आउटसोर्स कर्मचारियों के जरिये भी लिया जा रहा है। टनकपुर मंडल में प्रमोशन के पद पूरे हैं। टायर और अन्य सामग्री की कमी बीच-बीच में आती रहती है। फिर भी जो कमियां हैं उन्हें शॉर्टआउट किया जाएगा।
-एके बनवाल, आरएम, टनकपुर मंडल