भारत और नेपाल के बीच इस समय इसी झूलापुल से होती है आवाजाही
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नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहल प्रचंड की 14 सितंबर से होने वाली भारत यात्रा से नेपाल के बैतड़ी जिले के लोगों को काफी उम्मीदें हैं। इस दौरान भारत-नेपाल सीमा पर स्थित झूलाघाट कस्बे में महाकाली नदी पर बनने वाले पुल के निर्माण का काम शुरू होने की भी उम्मीद है। साथ ही अन्य पुलों पर भी काम आगे बढ़ने की संभावना है। दोनों देशों के सीमावर्ती लोगों की पुल को बनाने की मांग बहुत पुरानी है। 9 वर्ष पहले भी बैतड़ी वाणिज्य संघ ने 10 हजार लोगों का हस्ताक्षरयुक्त पत्र नेपाल सरकार और भारतीय राजदूत को भेजा था। पिछले वर्ष मुख्यमंत्री हरीश रावत के झूलाघाट दौरे के समय भी क्षेत्र की जनता ने पुल के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।
बैतड़ी वाणिज्य संघ के अध्यक्ष नर बहादुर चंद का कहना है कि करीब 40 वर्ष पहले भारत के झूलाघाट में सड़क पहुंच गई थी। नेपाल के जुलाघाट में भी सड़क को पहुंचे 5 वर्ष बीत चुके हैं। नेपाल और भारत को जोड़ने के लिए काली नदी पर नजदीक में कोई भी पुल नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बैतड़ी का प्रतिनिधिमंडल पुल निर्माण का मांगपत्र लेकर देहरादून भी गया। उस समय उत्तराखंड की सरकार ने 4 करोड़ स्वीकृत भी किए थे, लेकिन नेपाल सरकार की ओर से कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। नतीजतन बैतड़ी, दार्चुला, डडेलधूरा, बजांग और डोटी जिले के लोगों को भारत में आने-जाने के लिए लंबी दूरी की यात्रा कर प्रवेश करना होता है। इस कारण यहां के लोगों का समय और पैसा दोनों ही बर्बाद होता है।
झूलाघाट में पुल बनने से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने और भाड़ा कम होने से नेपाल में कम लागत में सामान मिलने लगेगा। साथ ही भारतीयों को पश्चिमांचल के त्रिपुरासुंदरी, निग्लासैनी, मैलोली आदि तीर्थस्थानों के दर्शन में आसानी होगी। बैतड़ी के लोगों ने अपने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि झूलाघाट में पुल बनाने के मसले को इस बार की भारत यात्रा के समय जरूर फाइनल कर दें। इस समय झूलाघाट से नेपाल जाने के लिए सिर्फ झूलापुल का सहारा है।