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नोटबंदी से बैंड वालों का भी बज गया बाजा 

Mon, 28 Nov 2016 10:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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बैंड वादक अबरार। - फोटो : अमर उजाला
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 नोटबंदी का असर बैंडबाजों वालों और बारातों में ढोल-नगाड़े, छलिया दलों पर बुरी तरह पड़ा है। नवंबर में पहाड़ों में विवाह ज्यादा होते हैं, लेकिन बैंडवालों की बुकिंग 60 फीसदी से ज्यादा गिर गई है। नगर में एक दर्जन से ज्यादा बैंडबाजे वाले हैं, उनके पास काम नहीं है। इनके लिए भोजन की व्यवस्था कर पाना कठिन हो गया है।
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आठ नवंबर को हुई नोटबंदी के बाद कोई नई बुकिंग नहीं मिल रही है। यदि बुकिंग मिल भी रही है तो बजाने वालों की संख्या सीमित करने पर सौदा हो रहा है। भुगतान कैश में कर पाने की स्थिति में कोई नहीं है। चेक से भुगतान करने पर बैंकों से पर्याप्त पैसा नहीं मिल पा रहा है। इस बार बैंड वाली बारातें नगर में गिनी चुनी ही नजर आई। ढोल-नगाड़ों वाले भी कम संख्या में दिख रहे हैं। लोग नोटों की कमी से विवाह के कार्यक्रम सीमित तरीके से कर रहे हैं।

बारातों की शान माने जाने वाले बैंड बाजों पर यह असर साफ देखने को मिल रहा है। 8 नवंबर के बाद से तो बैंडवालों की बुकिंग पर अचानक ब्रेक सा लग गया। इस बार लगन का मुहूर्त 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक है। 15 नवंबर के बाद होने वाली शादियों की बुकिंग के  लिए जो लोग बैंड वालों को कह गए थे। वे अब शादी को जनवरी-फरवरी में करने की बात कह रहे हैं। 
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शहर के सोनी बैंड के मालिक अबरार का कहना है कि उन्होंने एक महीने के लगन के लिए कई बजाने वाले बहेड़ी और पीलीभीत से बुला रखे थे। उनको आने-जाने का के लिए पैसा भी दे रखा है। इस सीजन में मात्र 7 बारातों की बुकिंग ही मिल पाई है। जबकि पिछले वर्ष तक 25 से 30 शादियों की बुकिंग मिला करती थी। अब बजाने वालों को भुगतान करने की समस्या आ गई है। जिनके यहां बारात हो चुकी है वह चेक से भुगतान दे रहे हैं। बजाने वाले बेहद गरीब हैं उनमे से कई के बैंक खाते तक नहीं हैं।

भारत बैंड के मालिक सरताज का कहना है कि बारातों में बैंड बाजों की बुकिंग 75 प्रतिशत तक कम हो गई है। बारातों में लोग पुराने 500 और 1000 के नोट दे रहे हैं। इसीलिए या तो बुकिंग कैंसिल करनी पड़ रही है या उधारी में काम करना पड़ रहा है। ऐसा ही रहा तो बाहर से बुलाए गए कारीगरों को जेब से पैसे देने पड़ेंगे। ढोल, नगाड़े और छलिया दलों को भी बहुत कम लोग बारातों में बुला रहे हैं। 
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